दिल्ली: समय के अनुसार अब डिजिटल स्पेस को रियल स्पेस बनाने की आवश्यकता है इसी के साथ, नगर स्तर से लेकर, एकेडमिक संस्थानो, कॉरपोरेट सेक्टर के साथ संस्कृति संस्थानो को आगे आकर कलाओं को स्पॉन्सर करना चाहिए, और इसके लिए कलाकारों को भी एक अप्रोच डेवलप करनी पड़ेगी, यह बात प्रख्यात रंगकर्मी एवं संगीत नाटक अकादमी के डिप्टी सेकेट्री (ड्रामा) श्री सुमन कुमार ने प्रासंगिक द्वारा आज दोपहर आयोजित 'डिजिटल प्लेटफार्म पर रंगकलाओं के अर्थतंत्र' की परिचर्चा के दौरान कही। सुमन कुमार जी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि डिजिटल स्पेस के अनुसार कलाकारों को अब छोटी और रोचक प्रस्तुतियां तैयार करने के साथ उसकी मार्केटिंग करना भी सीखने की आवश्यकता पर बल दिया, परिचर्चा में यह भी निकल कर आया कि आर्ट के लिए अमेजॉन या नेटफ्लिक्स जैसे चैंनल बनने के साथ कलाकर्मियों का CINTA या SWA जैसा एक राष्ट्रीय स्तर का संगठन भी बनना चाहिए । उनकी इस बात से परिचर्चा में शामिल प्रसिद्ध लेखक एवं रंगनिदेशक श्री नज़ीर कुरैशी, प्रख्यात रंगकर्मी श्री रामचन्द्र सिंह, प्रसिद्ध नृत्यांगना प्रतिभा सिंह, गायक एवं संगीतकार श्री नवनीत पांडेय, वरिष्ठ रंगकर्मी श्री बृजेश अनय, श्री सौरभ कौशिक, श्री शैलेन्द्र द्विवेदी, श्री बृजेश मिश्रा, श्री शिव पटेल आदि सभी ने सहमति व्यक्त की। क़रीब ढाई घण्टे चली इस डिजिटल चर्चा में मुख्य वक्ता सुमन जी सहित सभी लोगों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए संस्था के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक शुक्ला ने जून में जल्द ही पुनः आयोजित नाट्य पाठ में आने का आग्रह किया। रिपोर्ट@WJI सोशल मीडिया
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