पिछले कुछ दिनों में अगर आप सोशल मीडिया यूजर हैं या बहुत कम सक्रिय रहते हैं तब भी आपने “बाबा का ढाबा” नाम जरूर देखा सुना या कहीं पढ़ा होगा । जी हाँ , दिल्ली के मालवीय नगर में स्थित बाबा का ये छोटा सा ढाबा है जिसको बाबा (कांता प्रसाद) अपनी धर्मपत्नी के साथ मिलकर चलाते हैं । पिछले महीने यानी कि अक्टूबर 7 को फूड ब्लॉगर एवं इंस्टाग्राम इंफ्लुएंसर गौरव वासन (Gaurav Wasan) ने इस बुजुर्ग दम्पति की एक वीडियो अपने शोशल मीडिया पेज एवं अकॉउंट्स पर साझा की जिसमें बाबा अपनी पत्नी के साथ , महामारी कोरोना के लॉकडौन काल के दौरान अपने ढाबे को सही से ना चला पाने का संघर्ष , अपनी आर्थिक तंगी एवं जीवनयापन के एक मात्र स्त्रोत यानी कि उनका ढाबा ग्राहकों से खाली रहने की व्यथा बताते हुवे नज़र आये थे । ये बताते हुवे वह काफी भावुक भी हुवे थे जिसके बाद सोशल मीडिया पर यह वीडियो जमकर वायरल हुआ था, जिसके बाद बाबा और उनका ढाबा फेमस हो गया था ।
क्योंकि मुद्दा भावनात्मक जुड़ाव का हो गया था तो लोगो ने वीडियो वायरल होने के बाद बहुतायत संख्या में बाबा के ढाबे पर जाना शुरू किया , एवं कई बड़ी बॉलीवुड हस्तियों जैसे – अमिताभ बच्चन, रवीना टण्डन आदि ने बाबा की आर्थिक मदद की और लोगो से भी ऐसा करने या उनके ढाबे पर जाने की अपील की । सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स तथा फ़ूड ब्लॉगर्स ने अपने अकॉउंट्स आदि के माध्यम से बाबा के ढाबे की वीडियो को शेयर करते हुवे उनका प्रचार किया जिससे लोग भारी मात्रा में उनके ढाबे पर पहुंचने लगे और उनकी अच्छी खासी आमदनी होने लगी और बुजुर्ग दम्पति के चेहरों पर मुस्कान फिर से वापस लौट आयी । लेकिन सोशल मीडिया के ज़माने में जो चीज़ जितनी जल्दी वायरल होती है उतनी ही जल्दी विलुप्त भी होती है या यूं कह लें कि अगला ट्रेंडिंग टॉपिक आने की देर है लोग दूसरी ओर रुख कर लेते हैं कुछ ऐसा ही बाबा जी के साथ हुआ कुछ दिन बाद एक वीडियो में वह यहां तक बताते हुवे दिखे की लोग अब सिर्फ वहां सेल्फी लेने आते हैं ।अभी हाल ही में बाबा के ढाबा के मालिक कांता प्रसाद ने गौरव वासन जिन्होंने वीडियो बना के बाबा और उनके ढाबे को फेमस किया था ,के खिलाफ मालवीय नगर में पुलिस शिकायत दर्ज कराई है जिसमे उन्होंने गौरव पर मदद के लिए जुटाए गए पैसों में हेर फेर एवं धोखाधड़ी तथा आपराधिक साज़िश का आरोप लगाया है । पुलिस ने रविवार को यह जानकारी सार्वजनिक की । कांता प्रसाद ने यह भी कहा कि गौरव ने जानबूझकर सोशल मीडिया पर अपने और अपने परिवार या दोस्तों को बैंक डिटेल्स डाली और उन्हें बिना कोई जानकारी दिये मदद की भारी रकम एकत्र की । कुछ youTubers ने यह आरोप लगाया है कि गौरव ने भारी मात्रा में दान की राशि एकत्र की और बाबा को उसका बहुत छोटा हिस्सा ही दिया है ।फिलहाल गौरव वासन ने यू ट्यूब वीडियो और फेसबुक पोस्ट्स के माध्यम से अपना पक्ष रखा है एवं दावा किया है कि उन्होंने किसी प्रकार की कोई बेईमानी नही की तथा अपनी बात को सही साबित करने के लिये वह आगे वीडियो के माध्यम से बैंक का वैरिफाईड स्टेटमेंट लोगो के सामने प्रस्तुत करेंगे ।
मिल्यन टाइम्स सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत है ये एक छोटे से छोटे व्यक्ति की आवाज़ को प्रशासन पहुंचाने का प्लेटफार्म है यहाँ हम आम जनता से जुड़े मुद्दे पब्लिश करेंगे, कोशिश रहेगी कि उसका बेस्ट रिजल्ट सामने आए, हमें अपनी प्रतिक्रिया देते रहें। हमारे साथ रहें। हमारी ताकत बनें। Helpline No. +91-9953491534 Email id; milliontimesnews@gmail.com
Tuesday, November 3, 2020
बाबा ढाबा छोड़ लगाने लगे थाने के चक्कर , फ्रॉड का मामला दर्ज
Wednesday, October 7, 2020
यूजीसी ने 24 विश्वविद्यालयों को फर्जी घोषित किया, सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश और दिल्ली में
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने बुधवार को देश के 24 स्वयंभू और गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों की एक सूची जारी की। यूजीसी ने इन संस्थानों को फर्जी करार दिया है। आयोग की सूची के अनुसार इसमें सबसे ज्यादा संस्थान उत्तर प्रदेश और उसके बाद राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हैं। यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने कहा, छात्रों और जनता को बताया जाता है कि वर्तमान में 24 स्वयंभू और गैर मान्यता प्राप्त संस्थान यूजीसी कानून का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रहे हैं। इन्हें फर्जी यूनिवर्सिटी घोषित किया गया है और इन्हें कोई भी डिग्री प्रदान करने का अधिकार नहीं है। बता दें कि यूजीसी की इस फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल आठ संस्थान अकेले उत्तर प्रदेश में हैं। वहीं, राजधानी दिल्ली में ऐसे सात और ओडिशा और पश्चिम बंगाल में दो-दो संस्थान हैं। इसके अलावा कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और महाराष्ट्र में एक-एक फर्जी विश्वविद्यालय है।
उत्तर प्रदेश में चल रहे हैं ये फर्जी विश्वविद्यालय
वारणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
महिला ग्राम विद्यापीठ/विश्वविद्यालय, प्रयाग
गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ इलेक्ट्रोकॉमप्लेक्स होम्योपैथी, कानपुर
नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी), अलीगढ़
उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय, कोसी कलां, मथुरा
महाराणा प्रताप शिक्षा निकेतन विश्वविद्यालय, प्रतापगढ़
इंद्रप्रस्थ शिक्षा परिषद, इंस्टीट्यूशनल एरिया, माकनपुर, नोएडा
राजधानी दिल्ली में चल रहे ये फर्जी विश्वविद्यालय
कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, दरियागंज
यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, दिल्ली
वॉकेशनल यूनिवर्सिटी, दिल्ली
एडीआर-सेंट्रिक जूरीडीकल यूनिवर्सिटी, राजेंद्र प्लेस
विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एमप्लॉयमेंट, दिल्ली
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, रोहिणी
इन राज्यों में भी चल रहे हैं ये फर्जी विश्वविद्यालय
पश्चिम बंगाल : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन, कोलकाता और इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, कोलकाता
ओडिशा : नवभारत शिक्षा परिषद, राउरकेला और नॉर्थ ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, मयूरभंज
कर्नाटक : बडागानवी सरकार वर्ल्ड ओपन यूनिवर्सिटी एजुकेशन सोसायटी, बेलगाम
केरल : सेंट जॉन यूनिवर्सिटी कृष्णाटम, केरल
महाराष्ट्र : राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी, नागपुर
आंध्र प्रदेश : क्राइस्ट न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी, गुंटूर
पुडुचेरी : श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन
Monday, August 17, 2020
नए नियमों की अनदेखी करने पर रद्द हो सकता है ड्राइविंग लाइसेंस, पढ़िए कितना लगेगा जुर्माना....पढें पूरी खबर
सोमवार यानि 16 अगस्त से अगर आप नए मोटर व्हीकल एक्ट का पालन नहीं करते हैं तो आपकी जेब से भारी-भरकम चालान कटेगा. जी हां, नए मोटर व्हीकल एक्ट में चालकों की गलतियों पर जुर्मना 5 गुना से लेकर 30 गुना तक बढ़ा दिया गया है. ऐसे में घर से निकलते समय सारी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी हो गया है। अगर आप अब बिना लाइसेंस के ड्राइविंग करते हुए पकड़े जाते हैं तो आपको अब 500 रुपये नहीं बल्कि पांच हजार का भारी चालान भरना पड़ेगा. इसके अलावा नियमों की अनदेखी करने पर आपका लाइसेंस भी जब्त हो सकता है और जेल भी जाना पड़ सकता है. तो चलिए जानते हैं कि, सोमवार से नियमों में क्या-क्या बदलाव होने वाले हैं।
अगर आप बिना हेलमेट दो पहिया वाहन चलाते हुए पाए जाते हैं तो आपको 500 रुपये नहीं बल्कि 1000 रुपये भरने पड़ेंगे. इसके साथ ही 3 महीने तक के लिए आपका लाइसेंस भी सस्पेंड होने की नौबत आ सकती है।, पहले बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने पर 500 रुपये का चालान था लेकिन अब 5 हजार रुपये भरने पड़ेंगे, दोपहिया वाहनों पर अगर ओवर लोडिंग की जाती है तो अब 100 नहीं बल्कि 2 हजार रुपये भरने पड़ेंगे साथ ही तीन महीने तक लाइसेंस सस्पेंड हो सकता है। बिना सीट बेल्ट गाड़ी चलाने पर पहले 100 रुपये जुर्माना था जो बढ़कर 1 हजार रुपये हो गया है, कोई भी चालक अगर ड्राइव करते हुए फोन पर बात करता है तो अब 1 हजार नहीं बल्कि 5 हजार रुपये देने पड़ेंगे, पहली बार पकड़े जाने पर हल्के वाहनों पर एक से दो हजार जुर्माना लगेगा तो पहले महज 400 रुपये था। कोई भी चालक अगर बहुत तेज स्पीड में खतरनाक ड्राइविंग करता है तो पहली बार 6 महीने से 1 साल तक की जेल हो सकती है या 1 से 5 हजार रुपये तक जुर्माना भरना पड़ सकता है. जबकि दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना। शराब पीकर ड्राइविंग करना बहुत गलत होता है और अब जो भी चालक शराब के नशे में वाहन चलाएगा उसे उसकी पहली गलती पर 6 महीने तक जेल या 10 हजार रुपये जुर्माना और दूसरी बार पकड़े जाने पर 15 हजार तक जुर्माना भरना पड़ेगा।
कोई भी चालक अगर रेसिंग और स्पीडनिंग करता है तो पहली बार में 1 महीने की जेल या 5000 जुर्माना और दूसरी बार में 10 हजार तक जुर्माना। अगर इंश्योरेंस नहीं है तो पहली गलती पर 2 हजार जुर्माना और/या 3 महीने तक की जेल हो सकती है. जबकि दूसरी बार में 4 हजार रुपये का जुर्माना। इमरजेंसी वाहनों का रास्ता न देने की स्थिति में चालक का 10,000 रुपये जुर्माना या 6 महीने तक जेल की सजा या फिर दोनों हो सकते हैं। अगर गाड़ी नाबालिग चलाते हुए पाया जाता है तो उसके साथ अभिभावक/वाहन मालिक भी दोषी माने जाएंगे. इस स्थिति में 25 हजार रुपये जुर्माना और तीन साल की जेल होगी. इसके साथ ही एक साल के लिए वाहन का रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है। एसपी ट्रैफिक, जीतेंद्र कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि, वैसे तो नई दरों का आदेश 1 अगस्त से ही लागू था लेकिन कंप्यूटर में फीङ्क्षडग नहीं होने की वजह से इस आदेश को लागू करने में देरी हुई. मगर सोमवार से चालान की नई दरें लागू हो जाएंगी. सबको नियमों का पालन करना चाहिए।
Monday, July 20, 2020
2019-20 में 'शानदार' रहा जामिया यूनिवर्सिटी का प्रदर्शन: HRD मंत्रालय का आकलन
विश्वविद्यालय ने 2017 में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे. विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन का आकलन छात्रों की विविधता एवं समता, संकाय गुणवत्ता एवं संख्या, अकादमिक परिणामों, अनुसंधान प्रदर्शन, पहुंच, संचालन, वित्त, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग एवं मान्यता और पाठ्येतर गतिविधियों के पैमानों पर किया जाता है. मंत्रालय के ‘नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क' (एनआईआरएफ) की पिछले महीने घोषित रैंकिंग में जामिया विश्वविद्यालय 10वें स्थान पर रहा था. ‘समग्र' श्रेणी में विश्वविद्यालय को 16वां स्थान मिला था.
Thursday, July 16, 2020
दिल्ली दंगे सुनियोजित और संगठित थे: दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी ज़िले में फ़रवरी में हुए दंगे सुनियोजित, संगठित थे और निशाना बनाकर किए गए थे. ये कहना है दंगों की जाँच के लिए दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग की गठित कमेटी का. दिल्ली में 23 से 27 फ़रवरी के बीच दंगे हुए थे जिसमें आधिकारिक तौर पर 53 लोग मारे गए थे. इसकी जाँच के लिए दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने नौ मार्च को नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. सुप्रीम कोर्ट के वकील एमआर शमशाद कमेटी के चेयरमैन थे जबकि गुरमिंदर सिंह मथारू, तहमीना अरोड़ा, तनवीर क़ाज़ी, प्रोफ़ेसर हसीना हाशिया, अबु बकर सब्बाक़, सलीम बेग, देविका प्रसाद और अदिति दत्ता कमेटी के सदस्य थे.
कमेटी ने 134 पन्नों की अपनी रिपोर्ट 27 जून को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग को सौंप दी थी लेकिन आयोग ने गुरुवार का ये रिपोर्ट सार्वजनिक की है. कमेटी का कहना है कि उसने दंगों की जगह पर जाकर पीड़ितों के परिवारों से बात की, उन धार्मिक स्थलों का भी दौरा किया जिनकों दंगों में नुक़सान पहुँचाया गया था. कमेटी ने दिल्ली पुलिस से भी इस मामले में संपर्क किया और उनका पक्ष जानना चाहा, लेकिन कमेटी के अनुसार दिल्ली पुलिस ने उनके किसी भी सवाल या संवाद को कोई जवाब नहीं दिया.
दिल्ली पुलिस पहले भी अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार कर चुकी है और गृह मंत्री अमित शाह संसद में कह चुके हैं कि दिल्ली दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस ने अच्छा काम किया, दिसंबर, 2019 में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) बनने के बाद देशभर में इसके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन होने लगे. दिल्ली में भी कई जगहों पर सीएए के विरोध में प्रदर्शन होने लगे. दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के कई नेताओं ने सीएए विरोधियों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने के लिए भाषण दिए. ऐसे कई भाषणों को इस रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है.
हिंदू दक्षिणपंथी गुटों के ज़रिए सीएए के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों को डराने धमकाने के लिए उनपर हमले किए गए. 30 जनवरी को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रदर्शनकारियों पर रामभक्त गोपाल ने गोली चलाई और एक फ़रवरी को कपिल गुर्जर ने शाहीन बाग़ में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई. 23 फ़रवरी को बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के मौजपुर में दिए गए भाषण के फ़ौरन बाद दंगे भड़क गए. इस भाषण में कपिल मिश्रा ने जाफ़राबाद में सीएए के विरोध में बैठे प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हटाने की बात की थी और दिल्ली पुलिस के डीसीपी वेद प्रकाश सूर्या की मौजूदगी में कपिल मिश्रा ने ये भडकाऊ भाषण दिया था.
हथियारबंद भीड़ ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाक़ों में लोगों पर हमले किए, उनके घरों और दुकानों को आग लगा दी. इस दौरान भीड़ जय श्रीराम, हर-हर मोदी, काट दो इन. को और आज तुम्हें आज़ादी देंगे जैसे नारे लगा रही थी. मुसलमानों की दुकानों को चुन-चुन कर निशाना बनाया गया जिसमें स्थानीय युवक भी थे और कुछ लोग बाहर से लाए गए थे. अगर दुकान के मालिक हिंदू हैं और मुसलमान ने किराए पर दुकान ले रखी थी तो उस दुकान को आग नहीं लगाई गई थी, लेकिन दुकान के अंदर का सामान लूट लिया गया था. पीड़ितों से बातचीत के बाद लगता है कि ये दंगे अपने आप नहीं भड़के बल्कि ये पूरी तरह सुनियोजित और संगठित थे और लोगों को चुन-चुन कर निशाना बनाया गया था. रिपोर्ट के अनुसार 11 मस्जिद, पाँच मदरसे, एक दरगाह और एक क़ब्रिस्तान को नुक़सान पहुँचाया गया. मुस्लिम बहुल इलाक़ों में किसी भी ग़ैर-मुस्लिम धर्म-स्थल को नुक़सान नहीं पहुँचाया गया था.
इन दंगों में दिल्ली पुलिस की भूमिका बहुत ख़राब थी. कई जगहों पर वो तमाशाई बने रहे या फिर दंगाइयों को शह देते रहे. चश्मदीदों के अनुसार अगर किसी एक जगह एक पुलिस वाले ने दंगाइयों को रोकने की कोशिश भी की तो उसके साथी पुलिसवाले ने उसे ही रोक दिया. पीड़ितों के अनुसार पुलिस ने कई मामलों में एफ़आईआर लिखने से मना कर दिया और कई बार संदिग्ध का नाम हटाने के बाद एफ़आईआर लिखी. कई जगहों पर पुलिसवालों ने दंगाइयों को हमले के बाद ख़ुद सुरक्षित निकाल कर ले गए और कई जगह तो कुछ पुलिस वाले ख़ुद हमले में शामिल थे. महिला पीड़ितों के अनुसार कई जगहों पर उनके नक़ाब और हिजाब उतारे गए. दंगाई और पुलिस वालों ने धरने पर बैठी महिलाओं को निशाना बनाया और इसमें कई पुरुष पुलिसकर्मी ने महिलाओं के साथ बदतमीज़ी की. उनको रेप करने और एसिड हमले करने की धमकी दी गई.
कमेटी ने मुआवज़े के लिए लिखे गए 700 आवेदनों का अध्ययन किया. कमेटी ने पाया कि ज़्यादातर मामलों में क्षतिग्रस्त जगह का दौरा भी नहीं किया गया है और जिन मामलों में सही पाया गया है उनमें भी सिर्फ़ बहुत कम अंतरिम सहायता राशि दी गई है. दंगों के फ़ौरन बाद कई लोग घर छोड़ कर चले गए हैं, इसलिए वो मुआवज़े के लिए अपील भी नहीं कर सके हैं. मुआवज़े में भी सरकारी अधिकारी के मरने पर उनके परिवार वालों को एक करोड़ की रक़म दी गई जबकि आम नागरिकों की मौत पर केवल 10 लाख रुपए का मुआवज़ा दिया गया.
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में क़ानून-व्यवस्था की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है फिर भी दंगों में पीड़ितों को केंद्र सरकार की तरफ़ से कोई मदद नहीं की गई. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सिफ़ारिश की है कि सरकार या अदालत से अनुरोध किया जाए कि हाईकोर्ट के किसी रिटायर्ज जज की अध्यक्षता में एक पाँच सदस्यीय कमेटी बनााई जाए.
जज की अध्यक्षता वाली कमेटी एफ़आईआर नहीं लिखने, चार्जशीट की मॉनिटरिंग, गवाहों की सुरक्षा, दिल्ली पुलिस की भूमिका और उनके ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई जैसे मामलों में अपना फ़ैसला सुनाए. कमेटी ने ये भी कहा है कि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग को अपने एक्ट के अनुसार दंगों में शामिल होने या अपनी भूमिका ठीक से नहीं निभाने वाले दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में अभियोजक की बहाली, मुआवज़ा, क्षतिग्रस्त धार्मिक स्थलों की मोरम्मत जैसे मामलों में भी कई सुझाव दिए हैं.
हालांकि दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट में पेश किए गए एक हलफ़नामे में कहा है कि अब तक उन्हें ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जिनके आधार पर ये कहा जा सके कि बीजेपी नेता कपिल मिश्रा, परवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर ने किसी भी तरह लोगों को 'भड़काया हो या दिल्ली में दंगे करने के लिए उकसाया हो.' दिल्ली पुलिस ने ये हलफ़नामा एक याचिका के जवाब में पेश किया. इस याचिका में उन नेताओं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने की बात कही गई है, जिन्होंने जनवरी-फ़रवरी में विवादित भाषण दिया था. हलफ़नामे को पेश करते हुए डिप्टी कमिश्नर (क़ानून विभाग) राजेश देव ने ये भी कहा कि अगर इन कथित भड़ाकाऊ भाषणों और दंगों के बीच कोई लिंक आगे मिलेगा तो उचित एफ़आईआर दर्ज़ की जाएगी.
दिल्ली पुलिस की तरफ़ से दंगों को लेकर दर्ज कुल 751 अपराधिक मामलों का ज़िक्र करते हुए कोर्ट में कहा गया कि शुरुआती जाँच में ये पता चला है कि ये दंगे 'त्वरित हिंसा' नहीं थे बल्कि बेहद सुनियोजित तरीक़े से सोच समझ कर 'समाजिक सामंजस्य बिगाड़ा' गया. दिल्ली पुलिस ने इसी महीने के शुरू में अदालत में अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा है कि पूर्वी दिल्ली के दंगों के लिए सऊदी अरब और देश के अलग-अलग हिस्सों से मोटी रकम आई थी. पुलिस ने बुधवार को यह भी कहा ये दंगे अचानक नहीं भड़के थे, बल्कि दिल्ली में अधिक से अधिक जान-माल की हानि के लिए पहले से तैयारी की गई थी. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें इन दंगों की जड़ों तक पहुंचने और आरोप पत्र दाखिल करने के लिए वक़्त दिया जाए. इनमें आम आदमी पार्टी से निलंबित निगम पार्षद ताहिर हुसैन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र नेता मीरान हैदर और गुलिफ्सा खातून के नाम शामिल हैं. आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन पर आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की दंगों के दौरान हत्या मामले में अभियुक्त बनाया गया है. दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के ख़िलाफ़ दाख़िल चार्जशीट में कहा है कि अंकित शर्मा के शव पर बरामदगी के समय 51 ज़ख़्म मिले थे, जैसे उनपर किसी धारदार हथियार से हमला किया गया हो, जिससे लगता है कि पूरा मामला किसी बड़ी साज़िश का नतीजा थी.
Saturday, July 11, 2020
'न्याय के मंदिर का दरवाजा कभी नहीं होगा बंद'...सुप्रीम कोर्ट ने दिया भरोसा
फर्जी एसबीआई शाखा चलाने के लिए तीन लोग गिरफ्तार
हौजरानी प्रेस एन्क्लेव में बन सकता है फ्लाईओवर: 50 हजार से ज्यादा लोगों को जाम से मिलेगा छुटकारा
दिल्ली वालों को बड़ी राहत मिलने वाली है। साकेत मैक्स अस्पताल के बाहर पंडित त्रिलोक चंद शर्मा मार्ग पर लगने वाले जाम से जल्द मुक्ति मिलेगी। प...
-
( mtmediadelhi.blogspot.com ) केंद्र सरकार भीड़ हिंसा के खिलाफ केंद्रीय स्तर पर कानून बनाने के पक्ष में नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, गृह...
-
दिल्ली में जो हिंसा हुई है इसमें अब तक 40 से ज्यादा लोगों की जान गयी है। जो अभी भी रुकने का नाम नहीं ले रही है। देश की राजधानी में लगातार ...
-
पहले शनिवार फिर रविवार और अब सोमवार तीन दिनों से लगातार उत्तर-पूर्वी इलाके में हिंसा हो रही है और उस पर दिल्ली पुलिस अभी तक काबू नहीं कर प...






