तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद कराने की मांग को लेकर सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसानों का धरना-प्रदर्शन शनिवार को 38वें दिन में प्रवेश कर गया। सिंघु के साथ टीकरी और दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर भी बढ़ी संख्या में किसान तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं।इस बीच शनिवार दोपहर में दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान किसान संगठनों ने एलान किया है कि आगामी 6 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा, इसी के साथ 15 जनवरी तक भाजपा नेताओं का घेराव किया जाएगा। फिर 23 जनवरी को सुभाषचंद्र बोस के जन्मदिन तक राज्यपाल भवन तक मार्च निकाला जाएगा। आखिर में 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर किसान परेड मार्च होगा। संयुक्त किसान मोर्चा की इस पत्रकार वार्ता में बीएस राजेवाल, दर्शन पाल, गुरुनाम सिंह, जगजीत सिंह, शिव कुमार शर्मा कक्का व योगेन्द्र यादव शामिल हुए। उन्होंने कहा है कि अगर 4 जनवरी को हमारी बात नहीं मानी गई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।वहीं, कृषि कानूनों को लेकर यूपी गेट पर चल रहे किसान आंदोलन में प्रदेश के रामपुर जनपद के बिलासपुर निवासी कश्मीर सिंह ने गले में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उनके पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है। जानकारी के मुताबिक, इसमें उन्होंने अपनी जीवन लीला समाप्त करने के पीछे खुद को जिम्मेदार ठहराया है। किसान की मौत की खबर पर आंदोलन स्थल के किसानों में शोक है। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई है। वही किसान संगठनों ने आंदोलन स्थल के मंच से मृतक किसान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
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Saturday, January 2, 2021
Thursday, December 31, 2020
साल 2020 में बिछुड़ी हस्तियां : पूर्व राष्ट्रपति से लेकर मोदी सरकार के मंत्री तक, कई सितारों का भी अस्त
साल 2020 में राजनीतिक जगत से लेकर सिनेमा और अन्य क्षेत्र की कई नामचीन हस्तियों का निधन हो गया. कुछ का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया तो कुछ को कोरोना वायरस ने हमसे छीन लिया. एक उभरते सितारे ने खुदकुशी भी कर ली.
प्रणब मुखर्जी:
देश के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन 84 साल की उम्र में 31 अगस्त, 2020 को हो गया. बाथरूम में गिरने से उन्हें ब्रेन इन्ज्यूरी हो गई थी. इसके बाद उन्हें दिल्ली के आरआर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 21 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद उन्होंने 31 अगस्त 2020 को दम तोड़ दिया. उन्होंने राजनीति में काफी ऊंचा मुकाम बनाया लेकिन देश का प्रधानमंत्री न बन पाने की कसक उन्हें ताउम्र सालती रही. उनका जीवन विवादों से परे रहकर राजनीति में काम करने का एक अनुपम उदाहरण रहा है.
रामविलास पासवान:
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में खाद्य, उपभोक्ता एवं संरक्षण मामलों के मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक नेता रामविलास पासवान का निधन 8 अक्टूबर, 2020 को हो गया. देश के बड़े दलित नेताओं में शुमार पासवान 74 साल के थे. 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया जिले के शाहरबन्नी गांव के एक दलित परिवार में जन्मे रामविलास पासवान की गिनती बिहार ही नहीं, देश के कद्दावर नेताओं में की जाती थी. जेपी के दौर में वे भारतीय राजनीति में उभरे. उन्होंने 1977 के आम चुनावों में सर्वाधिक मतों (4.25 लाख वोट) से जीतने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. उन्होंने 1989 में अपने ही पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर 5.05 लाख वोट से जीतने का नया गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था.
अहमद पटेल:
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कोषाध्यक्ष अहमद पटेल का 25 नवंबर, 2020 को निधन हो गया. करीब चार दशक का राजनीतिक जीवन जीने वाले अहमद पटेल कांग्रेस के शर्मीले नेता के तौर पर जाने जाते थे. साल 2017 में जब गुजरात में राज्य सभा का चुनाव हो रहा था, तब उन्हें हराने के लिए अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी की जोड़ी ने उनके खिलाफ जबर्दस्त किलेबंदी की थी, बावजूद इसके उन्होंने जीत दर्ज की थी. इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के वे काफी करीब रहे. सोनिया गांधी के तो वो राजनीतिक सलाहकार थे. मधुर वाणी, मिलनसार और आतिथ्य सत्कार के उस्ताद अहमद पटेल को न चाहते हुए भी राहुल गांधी ने पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया था.अहमद पटेल कांग्रेस के संकटमोचकों में सबसे प्रमुख थे. वह 1993 से लगातार राज्यसभा के सदस्य थे.
जसवंत सिंह:
भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक नेताओं में शामिल रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का 27 सितंबर, 2020 को निधन हो गया. सिंह 82 साल के थे. उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हनुमान कहा जाता था. वाजपेयी सरकार में वो वित्त, विदेश और रक्षा मंत्री रहे थे. भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने से लेकर 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद पूरी दुनिया से भारत के रिश्तों को मजबूत करने तक के अपने सियासी सफर में जसवंत सिंह ने कई मील के पत्थर साबित किए. हालांकि, भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच शांति स्थापना का उनका सपना अधूरा रह गया. उनका मानना था कि ये तीनों देश एक ही मां की सिजेरियन प्रसव से पैदा हुई संतानें हैं, जिनके बीच आपसी रिश्ते बेहतर होने चाहिए. 2001 में जब संसद पर हमले हुए थे, तब सभी राजनीतिक पार्टियां पाकिस्तान को जवाबी कार्रवाई देने का दबाव बना रही थी, सेना पर सैनिकों की तैनाती भी हो चुकी थी लेकिन जसवंत सिंह ने एड़ी चोटी का जोर लगाकर ऐसा होने से रुकवा दिया था.
अमर सिंह:
बीजेपी के राज्यसभा सदस्य और समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह का निधन 1 अगस्त, 2020 को सिंगापुर के एक अस्पताल में हो गया था. उन्हें भारतीय राजनीति का मिडिल मैन से लेकर मिडिएटर तक कहा जाता था. इसी साल मार्च में भी उनके निधन की खबर उड़ी थी जिसका उन्होंने खुद खंडन किया था. मुलायम सिंह यादव और अमिताभ बच्चन के परिवार के काफी करीब रहे अमर सिंह का जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. वो एक ऐसे नेता थे जिनके विपक्षी दलों के बड़े नेताओं से भी मधुर रिश्ते होते थे. वो दोस्त बनाने और उसे निभाने के उस्ताद थे. उनके दोस्त सियासत की दुनिया से लेकर मनोरंजन, खेल, बिजनेस जगत तक सभी जगह थे. यहां तक की उनकी दोस्ती का असर वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस तक था. तभी तो उन्होंने बिल क्लिंटन को मुलायम सिंह यादव से मिलवाने लखनऊ बुलवा लिया था. उन्होंने एक प्रेस कॉन्प्रेन्स में खुले आम कहा था कि "हां, वो मुलायम सिंह के दलाल हैं."
तरुण गोगोई:
साल 2001 से लेकर 2016 तक तीन बार असम के मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई का 23 नवंबर 2020 को निधन हो गया. वह 86 साल के थे. कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने के बाद उन्हें दोबारा कई बीमारियों और जटिलताओं ने घेर लिया था. उन्हें असम का शालीन और कद्दावर नेता माना जाता था. वो बहुत कम बोलते थे. छह बार लोकसभा सांसद चुने जाने वाले तरुण गोगोई राजीव गांधी और इंदिरा गांधी के करीबी रहे. इंदिरा गांधी के वक्त उन्हें कांग्रेस का संयुक्त सचिव बनाया गया था. बाद में राजीव गांधी ने उन्हें महासचिव नियुक्त किया था. नरसिम्हा राव सरकार में वो खाद्य प्रसंस्करण मंत्री बनाए गए थे. बाद में 2001 में हितेश्वर सैकिया की जगह उन्हें असम का सीएम बनाया गया था.
सुशांत सिंह राजपूत:
बॉलीवुड के युवा और उभरते अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून, 2020 को आत्महत्या कर ली थी. बांद्रा स्थित एक अपार्टमेंट में उनके घर में उनकी लाश छत से लटकती हुई मिली थी. बिहार के रहने वाले युवा अभिनेता के 34 साल में ही दुनिया को अलविदा कहने से बॉलीवुड के साथ-साथ उनके फैन्स को गहरा सदमा लगा है. उनके परिजनों से लेकर फैन्स ने उनकी आत्महत्या पर संदेह जताया और उसकी सीबीआई जांच की मांग की. बिहार में इस पर काफी हंगामा हुआ. बिहार पुलिस इसकी जांच के लिए मुंबई तक गई. इसके बाद परिजनों की मांग पर नीतीश सरकार ने सीबीआई जांच की इजाजत दे दी. बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट ने भी जांच का जिम्मा मुंबई पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया. सीबीआई ने एम्स में विसरा रिपोर्ट की जांच कराई, जिसमें दम घुटने से मौत की बात कही गई है. एक्टर ने टीवी सीरियल 'किस देश में है मेरा दिल' से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था. इसके बाद उन्होंने 'काय पो चे' के जरिए बॉलीवुड में कदम रखा था.
ऋषि कपूर:
इस साल बिछुड़ने वाले सितारों में बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर भी शामिल हैं. बोन मैरो कैंसरी की असाध्य और लंबी बीमारी के बाद 30 अप्रैल, 2020 को 67 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था. वह एक अभिनेता के साथ-साथ फिल्म निर्माता और निर्देशक भी थे. 'मेरा नाम जोकर' फिल्म में वह बाल कलाकार के तौर पर भी काम कर चुके थे. उन्हें 'बॉबी' फिल्म के लिए साल 1974 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया था. 2008 में इस हरफनमौले सितारे को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था. उनके करीबी लोग और बॉलीवुड की हस्तियां ऋषि कपूर को प्यार से चिंटू जी कहकर पुकारते थे. वो युवा अवस्था में बॉलीवुड के चॉकलेटी हीरो के रूप में भी मशहूर रहे. वह कपूर खानदान के चिराग थे.
इरफान खान:
साल 2011 में पद्म श्री से सम्मानित और साल 2012 में 60वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता इरफान खान ने भी साल 2020 में दुनिया को अलविदा कह दिया. 54 साल की उम्र में 29 अप्रैल, 2020 को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया. इरफान खान न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर से पीड़ित थे. इसका इलाज कराने के लिए वो लंदन भी गए थे. साल भर इलाज कराने के बाद वो भारत लौटे थे. 2018 में उन्हें इस बीमारी के बारे में पता चला था. राजस्थान के टोंक जिले में मुस्लिम परिवार में पैदा हुए इरफान खान ने अपनी प्रतिभा के बल पर दुनिया में नाम रोशन किया. करीब 30 साल के करियर में उन्होंने 50 से अधिक फिल्मों में काम किया था.
Report@NDTV
CBSE Board Exam Date 2021: परीक्षाएं चार मई से होंगी शुरू
कोरोना के कारण बंद चल रहे स्कूलों के कारण बोर्ड परीक्षा की तारीख को लेकर चल रही उहापोह की स्थिति गुरुवार को खत्म हो गई। शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि बोर्ड की परीक्षाएं चार मई से शुरू होगी। एक मार्च से प्रैक्टिकल एक्गजाम होंगे। एक मार्च से प्रैक्टिकल एक्गजाम होंगे। मंत्री निशंक ने बताया कि 10 वीं और 12वीं की परीक्षा चार मई से शुरू होकर 10 जून तक चलेंगी। 15 जुलाई तक बोर्ड परीक्षा के नतीजे आएंगे। 12वीं के प्रैक्टिकल परीक्षा मार्च से शुरू होगी। परीक्षाएं सामान्य तरीके से ही होंगी। ऑनलाइन परीक्षा नहीं होगी।
बता दें कि लंबे समय से बोर्ड परीक्षा की तारीख को लेकर चल रही संशय की स्थिति आज खत्म हो गई है। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा में लाखों बच्चे एक्जाम देते हैं। इस बार कोरोना के कारण मार्च के बाद से ही केंद्र की पीएम मोदी सरकार ने देश में लॉकडाउन लगा दिया था। इसके बाद से ही स्कूल कॉलेजों में पढ़ाई बंद हो गई है। सभी बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। इस कारण बच्चों के सिलेबस समय पर खत्म नहीं हुए हैं। हालांकि यह बता दें कि स्कूल की ओर से यह पूरी कोशिश की जा रही है कि सिलेबस को समय पर पूरा किया जाए। वहीं सिलेबस के कुछ पार्ट को कम कर बच्चे पर से लोड कम किया गया है। गुरुवार को शिक्षा मंत्री ने लाइव का आकर बोर्ड की परीक्षा की तारीख घोषित कर दी है इससे अब बच्चों के मन में चल रहा संशय खत्म हो जाएगा। बच्चों के साथ उनके माता-पिता भी परीक्षा की तारीख को लेकर काफी तनाव में थे। इस पर आज विराम लगा है। अब बच्चे सीमित समय में अपने सिलेबस को खत्म कर बोर्ड की परीक्षाएं देने में जुटेंगे।
Tuesday, December 29, 2020
प्रयागराज पुलिस ने रोका तो सड़क पर धरना देकर बैठे दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती
आम आदमी पार्टी के विधायक व दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती मंगलवार को दिन में शहर पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र के बक्शी मोढ़ा में सरकारी विद्यालय और अस्पताल देखने निकले। करामत की चौकी के आगे बड़ी संख्या में तैनात पुलिस ने उनके काफिले को रोक लिया। इसे लेकर आप कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई। पुलिस पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए पूर्व मंत्री वहीं सड़क पर कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गए। बाद में अधिकारियों ने उनको समझा-बुझाकर वापस भेजा।
सोमनाथ भारती मंगलवार को दिन में पार्टी जिलाध्यक्ष अल्ताफ अहमद समेत 10 कार्यकर्ताओं के साथ बक्शी मोढ़ा के लिए रवाना हुए। वहां उन्हें सरकारी विद्यालय और अस्पताल में व्यवस्था को देखना था। पूर्व मंत्री का काफिला करामत की चौकी के आगे अंधीपुर गांव की पुलिया के पास पहुंचा था कि पुलिसकर्मियों ने उनका रास्ता रोक लिया। कहा गया कि वहां जाने की अनुमति नहीं है। नोकझोंक के बाद पूर्व मंत्री वहीं सड़क पर कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि सरकार द्वारा बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा को लेकर कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया है। जबकि दिल्ली सरकार ने यह सब काम किए हैं।दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती द्वारा इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (इविवि) में छात्रसंघ बहाली का समर्थन करने के बाद छात्र राजनीति फिर गरम हो गई। मंगलवार को अनशन को समर्थन देने पहुंचे सोमनाथ भारती ने कहा कि छात्रसंघ संवैधानिक और जनतांत्रिक अधिकार है। ऐसे में विश्वविद्यालय को इसे तत्काल बहाल कर देना चाहिए। छात्र युवा संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव विराट तिवारी ने भी अनशन को समर्थन दिया। पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष अदील हमजा के खिलाफ कूटरचित वीडियो जारी करने वाले रणविजय सिंह राजन के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। इस दौरान राहुल पटेल, मो. मुबाशिर हारुन, नवनीत यादव, मो. जाबिर रजा इलाहाबादी, शाश्वत श्रीवास्तव, अंकित परिहार, अलताफ अहमद, अॢपत त्रिपाठी, आनंद सांसद, मसूद अंसारी, प्रकाश सिंह, शिव शंकर सरोज, मो. अनस, रितेश गुप्ता, विजय सिंह, मो. सलमान आदि लोग उपस्थित रहे।
Tuesday, November 3, 2020
बाबा ढाबा छोड़ लगाने लगे थाने के चक्कर , फ्रॉड का मामला दर्ज
पिछले कुछ दिनों में अगर आप सोशल मीडिया यूजर हैं या बहुत कम सक्रिय रहते हैं तब भी आपने “बाबा का ढाबा” नाम जरूर देखा सुना या कहीं पढ़ा होगा । जी हाँ , दिल्ली के मालवीय नगर में स्थित बाबा का ये छोटा सा ढाबा है जिसको बाबा (कांता प्रसाद) अपनी धर्मपत्नी के साथ मिलकर चलाते हैं । पिछले महीने यानी कि अक्टूबर 7 को फूड ब्लॉगर एवं इंस्टाग्राम इंफ्लुएंसर गौरव वासन (Gaurav Wasan) ने इस बुजुर्ग दम्पति की एक वीडियो अपने शोशल मीडिया पेज एवं अकॉउंट्स पर साझा की जिसमें बाबा अपनी पत्नी के साथ , महामारी कोरोना के लॉकडौन काल के दौरान अपने ढाबे को सही से ना चला पाने का संघर्ष , अपनी आर्थिक तंगी एवं जीवनयापन के एक मात्र स्त्रोत यानी कि उनका ढाबा ग्राहकों से खाली रहने की व्यथा बताते हुवे नज़र आये थे । ये बताते हुवे वह काफी भावुक भी हुवे थे जिसके बाद सोशल मीडिया पर यह वीडियो जमकर वायरल हुआ था, जिसके बाद बाबा और उनका ढाबा फेमस हो गया था ।
क्योंकि मुद्दा भावनात्मक जुड़ाव का हो गया था तो लोगो ने वीडियो वायरल होने के बाद बहुतायत संख्या में बाबा के ढाबे पर जाना शुरू किया , एवं कई बड़ी बॉलीवुड हस्तियों जैसे – अमिताभ बच्चन, रवीना टण्डन आदि ने बाबा की आर्थिक मदद की और लोगो से भी ऐसा करने या उनके ढाबे पर जाने की अपील की । सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स तथा फ़ूड ब्लॉगर्स ने अपने अकॉउंट्स आदि के माध्यम से बाबा के ढाबे की वीडियो को शेयर करते हुवे उनका प्रचार किया जिससे लोग भारी मात्रा में उनके ढाबे पर पहुंचने लगे और उनकी अच्छी खासी आमदनी होने लगी और बुजुर्ग दम्पति के चेहरों पर मुस्कान फिर से वापस लौट आयी । लेकिन सोशल मीडिया के ज़माने में जो चीज़ जितनी जल्दी वायरल होती है उतनी ही जल्दी विलुप्त भी होती है या यूं कह लें कि अगला ट्रेंडिंग टॉपिक आने की देर है लोग दूसरी ओर रुख कर लेते हैं कुछ ऐसा ही बाबा जी के साथ हुआ कुछ दिन बाद एक वीडियो में वह यहां तक बताते हुवे दिखे की लोग अब सिर्फ वहां सेल्फी लेने आते हैं ।अभी हाल ही में बाबा के ढाबा के मालिक कांता प्रसाद ने गौरव वासन जिन्होंने वीडियो बना के बाबा और उनके ढाबे को फेमस किया था ,के खिलाफ मालवीय नगर में पुलिस शिकायत दर्ज कराई है जिसमे उन्होंने गौरव पर मदद के लिए जुटाए गए पैसों में हेर फेर एवं धोखाधड़ी तथा आपराधिक साज़िश का आरोप लगाया है । पुलिस ने रविवार को यह जानकारी सार्वजनिक की । कांता प्रसाद ने यह भी कहा कि गौरव ने जानबूझकर सोशल मीडिया पर अपने और अपने परिवार या दोस्तों को बैंक डिटेल्स डाली और उन्हें बिना कोई जानकारी दिये मदद की भारी रकम एकत्र की । कुछ youTubers ने यह आरोप लगाया है कि गौरव ने भारी मात्रा में दान की राशि एकत्र की और बाबा को उसका बहुत छोटा हिस्सा ही दिया है ।फिलहाल गौरव वासन ने यू ट्यूब वीडियो और फेसबुक पोस्ट्स के माध्यम से अपना पक्ष रखा है एवं दावा किया है कि उन्होंने किसी प्रकार की कोई बेईमानी नही की तथा अपनी बात को सही साबित करने के लिये वह आगे वीडियो के माध्यम से बैंक का वैरिफाईड स्टेटमेंट लोगो के सामने प्रस्तुत करेंगे ।
Wednesday, October 7, 2020
यूजीसी ने 24 विश्वविद्यालयों को फर्जी घोषित किया, सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश और दिल्ली में
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने बुधवार को देश के 24 स्वयंभू और गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों की एक सूची जारी की। यूजीसी ने इन संस्थानों को फर्जी करार दिया है। आयोग की सूची के अनुसार इसमें सबसे ज्यादा संस्थान उत्तर प्रदेश और उसके बाद राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हैं। यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने कहा, छात्रों और जनता को बताया जाता है कि वर्तमान में 24 स्वयंभू और गैर मान्यता प्राप्त संस्थान यूजीसी कानून का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रहे हैं। इन्हें फर्जी यूनिवर्सिटी घोषित किया गया है और इन्हें कोई भी डिग्री प्रदान करने का अधिकार नहीं है। बता दें कि यूजीसी की इस फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल आठ संस्थान अकेले उत्तर प्रदेश में हैं। वहीं, राजधानी दिल्ली में ऐसे सात और ओडिशा और पश्चिम बंगाल में दो-दो संस्थान हैं। इसके अलावा कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और महाराष्ट्र में एक-एक फर्जी विश्वविद्यालय है।
उत्तर प्रदेश में चल रहे हैं ये फर्जी विश्वविद्यालय
वारणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
महिला ग्राम विद्यापीठ/विश्वविद्यालय, प्रयाग
गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ इलेक्ट्रोकॉमप्लेक्स होम्योपैथी, कानपुर
नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी), अलीगढ़
उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय, कोसी कलां, मथुरा
महाराणा प्रताप शिक्षा निकेतन विश्वविद्यालय, प्रतापगढ़
इंद्रप्रस्थ शिक्षा परिषद, इंस्टीट्यूशनल एरिया, माकनपुर, नोएडा
राजधानी दिल्ली में चल रहे ये फर्जी विश्वविद्यालय
कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, दरियागंज
यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, दिल्ली
वॉकेशनल यूनिवर्सिटी, दिल्ली
एडीआर-सेंट्रिक जूरीडीकल यूनिवर्सिटी, राजेंद्र प्लेस
विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एमप्लॉयमेंट, दिल्ली
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, रोहिणी
इन राज्यों में भी चल रहे हैं ये फर्जी विश्वविद्यालय
पश्चिम बंगाल : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन, कोलकाता और इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, कोलकाता
ओडिशा : नवभारत शिक्षा परिषद, राउरकेला और नॉर्थ ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, मयूरभंज
कर्नाटक : बडागानवी सरकार वर्ल्ड ओपन यूनिवर्सिटी एजुकेशन सोसायटी, बेलगाम
केरल : सेंट जॉन यूनिवर्सिटी कृष्णाटम, केरल
महाराष्ट्र : राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी, नागपुर
आंध्र प्रदेश : क्राइस्ट न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी, गुंटूर
पुडुचेरी : श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन
Monday, August 17, 2020
नए नियमों की अनदेखी करने पर रद्द हो सकता है ड्राइविंग लाइसेंस, पढ़िए कितना लगेगा जुर्माना....पढें पूरी खबर
सोमवार यानि 16 अगस्त से अगर आप नए मोटर व्हीकल एक्ट का पालन नहीं करते हैं तो आपकी जेब से भारी-भरकम चालान कटेगा. जी हां, नए मोटर व्हीकल एक्ट में चालकों की गलतियों पर जुर्मना 5 गुना से लेकर 30 गुना तक बढ़ा दिया गया है. ऐसे में घर से निकलते समय सारी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी हो गया है। अगर आप अब बिना लाइसेंस के ड्राइविंग करते हुए पकड़े जाते हैं तो आपको अब 500 रुपये नहीं बल्कि पांच हजार का भारी चालान भरना पड़ेगा. इसके अलावा नियमों की अनदेखी करने पर आपका लाइसेंस भी जब्त हो सकता है और जेल भी जाना पड़ सकता है. तो चलिए जानते हैं कि, सोमवार से नियमों में क्या-क्या बदलाव होने वाले हैं।
अगर आप बिना हेलमेट दो पहिया वाहन चलाते हुए पाए जाते हैं तो आपको 500 रुपये नहीं बल्कि 1000 रुपये भरने पड़ेंगे. इसके साथ ही 3 महीने तक के लिए आपका लाइसेंस भी सस्पेंड होने की नौबत आ सकती है।, पहले बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने पर 500 रुपये का चालान था लेकिन अब 5 हजार रुपये भरने पड़ेंगे, दोपहिया वाहनों पर अगर ओवर लोडिंग की जाती है तो अब 100 नहीं बल्कि 2 हजार रुपये भरने पड़ेंगे साथ ही तीन महीने तक लाइसेंस सस्पेंड हो सकता है। बिना सीट बेल्ट गाड़ी चलाने पर पहले 100 रुपये जुर्माना था जो बढ़कर 1 हजार रुपये हो गया है, कोई भी चालक अगर ड्राइव करते हुए फोन पर बात करता है तो अब 1 हजार नहीं बल्कि 5 हजार रुपये देने पड़ेंगे, पहली बार पकड़े जाने पर हल्के वाहनों पर एक से दो हजार जुर्माना लगेगा तो पहले महज 400 रुपये था। कोई भी चालक अगर बहुत तेज स्पीड में खतरनाक ड्राइविंग करता है तो पहली बार 6 महीने से 1 साल तक की जेल हो सकती है या 1 से 5 हजार रुपये तक जुर्माना भरना पड़ सकता है. जबकि दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना। शराब पीकर ड्राइविंग करना बहुत गलत होता है और अब जो भी चालक शराब के नशे में वाहन चलाएगा उसे उसकी पहली गलती पर 6 महीने तक जेल या 10 हजार रुपये जुर्माना और दूसरी बार पकड़े जाने पर 15 हजार तक जुर्माना भरना पड़ेगा।
कोई भी चालक अगर रेसिंग और स्पीडनिंग करता है तो पहली बार में 1 महीने की जेल या 5000 जुर्माना और दूसरी बार में 10 हजार तक जुर्माना। अगर इंश्योरेंस नहीं है तो पहली गलती पर 2 हजार जुर्माना और/या 3 महीने तक की जेल हो सकती है. जबकि दूसरी बार में 4 हजार रुपये का जुर्माना। इमरजेंसी वाहनों का रास्ता न देने की स्थिति में चालक का 10,000 रुपये जुर्माना या 6 महीने तक जेल की सजा या फिर दोनों हो सकते हैं। अगर गाड़ी नाबालिग चलाते हुए पाया जाता है तो उसके साथ अभिभावक/वाहन मालिक भी दोषी माने जाएंगे. इस स्थिति में 25 हजार रुपये जुर्माना और तीन साल की जेल होगी. इसके साथ ही एक साल के लिए वाहन का रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है। एसपी ट्रैफिक, जीतेंद्र कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि, वैसे तो नई दरों का आदेश 1 अगस्त से ही लागू था लेकिन कंप्यूटर में फीङ्क्षडग नहीं होने की वजह से इस आदेश को लागू करने में देरी हुई. मगर सोमवार से चालान की नई दरें लागू हो जाएंगी. सबको नियमों का पालन करना चाहिए।
हौजरानी प्रेस एन्क्लेव में बन सकता है फ्लाईओवर: 50 हजार से ज्यादा लोगों को जाम से मिलेगा छुटकारा
दिल्ली वालों को बड़ी राहत मिलने वाली है। साकेत मैक्स अस्पताल के बाहर पंडित त्रिलोक चंद शर्मा मार्ग पर लगने वाले जाम से जल्द मुक्ति मिलेगी। प...
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( mtmediadelhi.blogspot.com ) केंद्र सरकार भीड़ हिंसा के खिलाफ केंद्रीय स्तर पर कानून बनाने के पक्ष में नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, गृह...
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दिल्ली में जो हिंसा हुई है इसमें अब तक 40 से ज्यादा लोगों की जान गयी है। जो अभी भी रुकने का नाम नहीं ले रही है। देश की राजधानी में लगातार ...
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पहले शनिवार फिर रविवार और अब सोमवार तीन दिनों से लगातार उत्तर-पूर्वी इलाके में हिंसा हो रही है और उस पर दिल्ली पुलिस अभी तक काबू नहीं कर प...






