दक्षिणी दिल्ली : आउटर रिंग रोड पर चिराग दिल्ली फ्लाई ओवर के नीचे उसके समानांतर ट्रैफिक की आवाजाही पुलिस ने बंद कर दी है। इससे अब इस प्वॉइंट पर जाम लगना बंद हो गया है। लोगों को जाम से राहत दिलाने के लिए यातायात पुलिस ने यह पहल की है। यातायात पुलिसकर्मियों का कहना है कि इस रेडलाइट पर लोगों के साथ ही उन्हें भी काफी राहत मिली है। अब इस फ्लाईओवर के नीचे दोनों ओर से सिर्फ लेफ्ट व राइट टर्न लिया जा सकता है। दोनों ओर से पुलिस ने यहां पर अस्थायी सूचक भी लगा दिए हैं। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी ने बताया कि जिन लोगों को अभी इसकी जानकारी नहीं है और वे गलती से सीधे निकल जाते हैं उन्हें समझाकर छोड़ दिया जाता है। पुलिस ने यहां पर दोनों ओर लगे ट्रैफिक सिग्नल में भी स्ट्रेट ग्रीन हटा दिया है। अब यहां पर मुनिरका या नेहरू प्लेस की ओर से आने वाले लोग दाहिने या बाएं मुड़ सकते हैं। सीधे नहीं जा सकते। पुलिस की इस पहल से लाल बहादुर शास्त्री मार्ग (पुराना बीआरटी) पर जाम काफी कम हो गया है। एलबीएस मार्ग हुआ सिग्नल फ्री : यातायात पुलिस ने यह पहल एलबीएस मार्ग को पूरी तरह से सिग्नल फ्री करने के लिए की है। यातायात पुलिस ने इसके तहत सादिक नगर चौराहे से राजाराम मार्ग तिराहे तक पांच चौराहे-तिराहे बंद करके 10 अस्थायी यू-टर्न बनाए हैं। जल्द इन्हें स्थायी रूप से पक्का बनाया जाएगा। सादिक नगर, पुष्प भवन चौराहा व राजा राम मार्ग तिराहा, चिराग दिल्ली व शेख सराय चौराहों पर अब लोगों को जाम से काफी राहत मिली है। इस पहल से दक्षिणी दिल्ली की ग्रेटर कैलाश, मालवीय नगर, पुष्प विहार, डिफेंस कॉलोनी, साकेत, पंचशील, शेख सराय, कृषि विहार, डिफेंस कॉलोनी, एंड्रयूजगंज, लाजपत नगर आदि कॉलोनियों के लोगों को जाम से राहत मिली है। पीक ऑवर में सुबह-शाम यहां लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ता था। एलबीएस मार्ग का सबसे व्यस्त चौराहा : एलबीएस मार्ग के चिराग दिल्ली चौराहे पर यातयात का सबसे ज्यादा दबाव रहता है। दरअसल, चिराग दिल्ली चौराहा एयरपोर्ट और एमबी रोड को जोड़ता है। वहीं, गुरुग्राम और नोएडा जाने आने-जाने के लिए भी लोग इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। नेहरू प्लेस से मुनिरका व एयरपोर्ट आने-जाने वाले वाहन तो फ्लाइओवर से निकल जाते हैं लेकिन साकेत, जीके व अन्य लोकल कॉलोनियों के लोगों को नीचे से ही निकलना पड़ता है। इसलिए यातायात पुलिस को यह कदम उठाने की जरूरत महसूस हुई।
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Thursday, November 21, 2019
Tuesday, November 19, 2019
दिल्ली, यूपी समेत उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भूकंप के झटके
दिल्ली, यूपी समेत उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। हालांकि अभी किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। सोमवार को गुजरात में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। भूकंप का केंद्र बिंदु भारत-नेपाल बताया जा रहा है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5 मापी गई है। कुछ जगहों पर भूकंप के झटके महसूस होने के बाद लोग अपने दफ्तर और घरों से बाहर निकल आए। यूनाइटेड स्टेट जिओलॉजिकल सर्वे के मुताबिक भूकंप का इपिसेंटर नेपाल के खपताड़ नेशनल पार्क के करीब रहा। बरेली और पीलीभीत में भूकंप के झटके, मचा हड़कंप | शाम 7 बजकर 2 मिनट पर महसूस किए गए झटके । करीब 10 सेकेंड लगे झटके तो घरों से बहार भागे लोग और किसी जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं, लोग डरे, भूकंप आने से पहले इसकी जानकारी होने की संभावना नहीं होती है। ऐसे समय यह समझना मुश्किल होता है कि क्या करना उचित होगा। आज सुबह दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की खबर लगते ही लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल हो गया। ऐसे में आप कुछ उपाय अपनाकर खुद और अपने परिजनों को इस आपदा से बचा सकते हैं। ऐसे में मकान, दफ्तर या किसी भी इमारत में अगर आप मौजूद हैं तो वहां से बाहर निकलकर खुले में आ जाएं। इसके बाद खुले मैदान की ओर भागें। भूकंप के दौरान खुले मैदान से ज्यादा सुरक्षित जगह कोई नहीं होती। भूकंप आने की स्थिति में किसी बिल्डिंग के आसपास न खड़े हों। अगर आप ऐसी बिल्डिंग में हैं, जहां लिफ्ट हो तो लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। ऐसी स्थिति में सीढ़ियों का इस्तेमाल करना ही उचित होता है। भूकंप के दौरान घर के दरवाजे और खिड़की को खुला रखें। इसके अलावा घर की सभी बिजली स्विच को ऑफ कर दें। अगर बिल्डिंग बहुत ऊंची हो और तुरंत उतर पाना मुमकिन न हो तो बिल्डिंग में मौजूद किसी मेज, ऊंची चौकी या बेड के नीचे छिप जाएं। भूकंप के दौरान लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वो पैनिक न करें और किसी भी तरह की अफवाह न फैलाएं, ऐसे में स्थिति और बुरी हो सकती है।
Tuesday, November 5, 2019
साकेत कोर्ट हिंसा के मामले में पुलिस ने दर्ज किए दो मुकदमें
दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है. तीस हजारी कोर्ट के बाद सोमवार को साकेत कोर्ट के बाहर वकीलों ने पुलिसकर्मी से बदसलूकी की. इस मामले में दो मुकदमें दर्ज किए गए हैं. पहला मुकदमा पुलिसकर्मी की शिकायत पर बदसलूकी करने वाले वकील पर दर्ज किया गया है, जबकि दूसरा मुकदमा टैक्सी ड्राइवर की शिकायत पर दर्ज किया गया, जिस पर स्टील की रॉड से हमला किया गया था. हालांकि इस एफआईआर में किसी का नाम नहीं दर्ज किया गया है. तीस हजारी कोर्ट में शनिवार को वकीलों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प के परिणाम सोमवार को भी देखने को मिले. दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकील हड़ताल पर चले गए. सिर्फ जिला अदालत में ही नहीं बल्कि दिल्ली हाई कोर्ट में भी वकील जज के सामने पेश नहीं हुए. इतना ही नहीं हड़ताल के दौरान वकीलों ने न सिर्फ सड़कों पर प्रदर्शन कर आम लोगों को रोककर ट्रैफिक जाम किया बल्कि पत्रकारों और आम लोगों के साथ मारपीट भी की. इस बीच साकेत कोर्ट के पास वकीलों ने एक पुलिसवाले की पिटाई कर दी. साकेत कोर्ट के पास वकीलों ने एक दिल्ली पुलिस के जवान की पिटाई कर दी. बाइक सवार दिल्ली पुलिस के जवान को वकीलों ने घेर लिया और थप्पड़ जड़ने लगे. जब जवान वहां से भागने लगा तो वकीलों ने उस पर हेलमेट चलाकर मारा. हालांकि हेलमेट उसके बाइक पर लगा. पीड़ित पुलिसवाले ने साकेत थाने में शिकायत दर्ज कराई है. बताया जा रहा है कि इस मामले में दिल्ली पुलिस वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सकती है.
Wednesday, October 30, 2019
स्तन कैंसर, जो 40 से कम उम्र की महिलाओं को बनाता है निशाना
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक प्रतिवर्ष लगभग 21 लाख महिलाएं स्तन (ब्रेस्ट) कैंसर की चपेट में आ जाती हैं। भारत में हर 28वीं महिला को किसी ने किसी रूप में ब्रेस्ट कैंसर होता है। इस तरह ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं को सबसे ज्यादा होने वाली कैंसर की बीमारी है। दुर्भाग्य से इसे लेकर जागरुकता का बहुत अभाव है। कितने लोग जानते हैं कि अकेला ब्रेस्ट कैंसर 12 प्रकार का होता है। कैंसर के प्रकार इस बात पर निर्भर होते हैं कि वह आक्रामक (दूसरे अंगों में फैलने वाला है), गैर-आक्रामक (केवल एक ही अंग तक सीमित रहने वाला) या फिर यूनिफोकल (केवल एक ट्यूमर) या मल्टीफोकल (कई ट्यूमर्स) है।
myupchar.com से जुड़े एम्स के डॉ. उमर अफरोज के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर का इलाज शुरू करने से पहले यह जानना जरूरी होता है कि कैंसर किस प्रकार का है। जो महिलाएं स्तनपान करवाती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है। बहरहाल, दुनियाभर में अक्टूबर को ब्रेस्ट कैंसर जागरुकता माह के तौर पर मनाया जाता है। जानिए उन ब्रेस्ट कैंसर के बारे में जो आमतौर पर 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को प्रभावित करते हैं।
मेडुलरी ब्रेस्ट कैंसर - यह एक दुर्लभ, लेकिन आक्रामक किस्म का ब्रेस्ट कैंसर है। इसकी शुरुआत दुग्ध नलिकाओं (डक्टल कार्सिनोमा) से होती है। इन्हें यह नाम दिया गया है क्योंकि प्रभावित टिश्यूज दिमाग में मौजूद मेडुला की ही तरह मुलायम और मांसल होते हैं। मेडुलरी ब्रेस्ट कैंसर कुल ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में केवल 3-5 प्रतिशत ही होते हैं। यह अधिकतर 40 से 50 वर्ष की महिलाओं को प्रभावित करता है। डॉ. उमर अफरोज के अनुसार, यह धीरे-धीरे फैलता है लेकिन स्तन के बाहर के किसी भी टिश्यू को प्रभावित नहीं करता। इसके लक्षण काफी स्पष्ट होने के कारण इसे पहचान कर इसके इलाज के ज्यादा आसार होते हैं।
पेजेट्स डिसीज ऑफ द ब्रेस्ट - यह बीमारी अधिकतर निप्पल के इर्द-गिर्द मौजूद काले हिस्से (एरोला) की त्वचा को प्रभावित करती है। इसकी पहचान के लिए डॉक्टर्स बड़े सेल्स (पेजेट्स सेल) को खोजते हैं। हालांकि अधिकांश मरीजों को ब्रेस्ट के भीतर भी एक-दो ट्यूमर होते हैं। इस तरह के कैंसर के मरीज 1-4 प्रतिशत होते हैं। पेजेट कैंसर हर उम्र की महिला को अपनी चपेट में ले सकता है। किशोरियों से लेकर 80 वर्ष तक की उम्र की महिलाओं को।
ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर - डॉ. उमर अफरोज के अनुसार, इस प्रकार के कैंसर के इलाज के लिए जरूरी है कि ट्यूमर में निम्नलिखित तीन लक्षण हो- एस्ट्रोजेन रिसेप्टर्स न हो, प्रोजेस्टेरोन रिसेप्ट्स न हो और एचईआर रिसेप्टर्स न हो। इनमें से कोई-सा भी रिसेप्टर ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के लिए जिम्मेदार नहीं होता। यह एक किस्म की समस्या है क्योंकि यह कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर के सामान्य इलाज को प्रभावी नहीं होने देता है। यह इलाज है हार्मोन थैरेपी जो एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन रिसेप्टर्स के कामकाज को रोकती है और दूसरी दवा जो एचईआर-2 द्वारा उत्पन्न प्रोटीन को अपना निशाना बनाती है। ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर में इनमें से कोई भी रिसेप्टर्स नहीं होते और इस वजह से उसका इलाज बहुत मुश्किल हो जाता है। युवतियों में ज्यादा होने वाला यह ब्रेस्ट कैंसर तकरीबन 10-20 प्रतिशत में पाया जाता है। इस किस्म का कैंसर आक्रामक (नजदीकी टिश्यूज और लिम्फ नोड्स में फैलने वाला) हो सकता है और इसके दोबारा होने की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इलाज में कीमोथैरेपी भी शामिल है। हालांकि गांठ को हटाना या समूचे ब्रेस्ट को ही हटा देना सर्वश्रेष्ठ विकल्प होता है।
बेसल-लाइक ब्रेस्ट कैंसर - इस कैंसर को यह नाम दिया गया है क्योंकि यह दुग्ध वाहिनियों की अंदरुनी परत (बेसल लेयर) में पाया जाता है। ज्यादातर मामले में यह 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को प्रभावित करता है और इसकी पहचान मुश्किल होती है। इस किस्म के कैंसर को अधिकांश मामलों में ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर समझ लिया जाता है,क्योंकि इसमें भी ब्रेस्ट कैंसर के तीनों रिसेप्टर्स में से कोई नहीं होता। कनाडा कैंसर सोसायटी के मुताबिक, सभी बेसल-लाइक ब्रेस्ट कैंसर, ट्रिपल निगेटिव नहीं होते। साथ ही बेसल सेल टाइप कैंसर द्वारा प्रोटीन में कुछ ऐसे परिवर्तन किए जाते हैं जो ट्रिपल निगेटिव टाइप ब्रेस्ट कैंसर में नहीं होते।
रिसर्च के मुताबिक युवतियों को प्रभावित करने वाले ब्रेस्ट कैंसर ऊंचे ग्रेड के होते हैं, हार्मोन रिसेप्टर निगेटिव और आमतौर पर ज्यादा आक्रामक होते हैं। जिन परिवारों में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास है, वहां कि लड़कियों को समय-समय पर डॉक्टर से संपर्क साधकर अल्ट्रासाउंड या एमआरआई करा लेना चाहिए।
Tuesday, October 29, 2019
जब जामिया के सबसे छोटे बच्चे ने रखी जामिया में नई बिल्डिंग की नींव…
01 मार्च, 1935 को जामिया के सबसे छोटे छात्र अब्दुल अज़ीज़ के हाथों ओखला में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की पहली बिल्डिंग की नींव रखी गई. जामिया के सबसे छोटे बच्चे के हाथों नींव रखवाने का ये आईडिया डॉ. ज़ाकिर हुसैन का था. ज़ाकिर हुसैन साहब का ये आईडिया गांधी जी को ख़ूब पसंद आया. इस संबंध में गांधी ने ज़ाकिर हुसैन को एक पत्र लिखा. प्रेस को भी अपना बयान जारी किया और कहा कि ‘यह एक बहुत श्रेष्ठ विचार है कि जामिया की बुनियाद उसके सबसे छोटे बच्चे द्वारा रखी जाए. इस कल्पना की मौलिकता पर मेरी बधाई. मैं जानता हूं कि जामिया का भविष्य उज्जवल है. मैं आशा करता हूं कि इसके द्वारा हिन्दू-मुस्लिम एकता का बीज एक शानदार वृक्ष के रूप में उगेगा. इसलिए मैं इस साहसिक प्रयास की हर सफलता के लिए कामना करता हूं…’
डॉ. ज़ाकिर हुसैन (8 फरवरी, 1897-3 मई, 1969) 1926 से लेकर 1948 तक जामिया के वाइस चांसलर रहे. 1963 में जामिया के चांसलर बने, बता दें कि जामिया की ‘इस इमारत के चीफ़ आर्किटेक्ट कार्ल हेंज थे. कार्ल तुर्की के एक प्रिंस अब्दुल करीम के साथ हैदराबाद पहुंचे थे. डॉ. ज़ाकिर हुसैन और कार्ल हेंज जल्द ही जर्मन भाषा के अपने सामान्य ज्ञान के कारण दोस्त बन गए. हेंज ने स्वेच्छा से बिना किसी शुल्क के जामिया के लिए इमारतों को डिजाइन किया. कार्ल हेंज के डिजाइनों को व्यावहारिक रूप मिस्त्री अब्दुल्ला ने दिया. इंजीनियर ख़्वाजा लतीफ़ हसन पानीपति ने भी कभी-कभी निर्माण कार्य की देख-रेख के लिए स्वेच्छा से काम किया था.’
डॉ. ज़ाकिर हुसैन आज भी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से जुड़े लोगों के लिए एक प्रेरणा-स्त्रोत हैं. पिछले दिनों जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जामिया से पढ़े अफ़रोज़ आलम साहिल की किताब ‘जामिया और गांधी’ का कवर पेज़ रिलीज़ किया गया. ये रिलीज़ जामिया के ‘मुशीर फ़ातिमा नर्सरी स्कूल’ के नर्सरी क्लास की छात्रा नबीहा जहांगीर और छात्र ख़ुर्रम साक़िब के हाथों हुआ. ये दोनों बच्चे कश्मीर के रहने वाले हैं. जब इस किताब के लेखक अफ़रोज़ आलम साहिल से बच्चों द्वारा अपने किताब का कवर रिलीज़ कराने के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि ये प्रेरणा उन्होंने डॉ. ज़ाकिर हुसैन साहब से ली है.
साहिल पिछले कई सालों से इस किताब को लेकर रिसर्च कर रहे थे. ये एक रिसर्च आधारित किताब है. उम्मीद है कि जामिया के फ़ाउंडेशन डे पर ये किताब रिलीज़ जाएगी. ये किताब ख़िलाफ़त आन्दोलन के ‘सरफ़िरों’ व जामिया में ख़ेमाज़न होने वाले उन तमाम ‘दीवानों’ को समर्पित है, जिनके दयार से न जाने अब तक कितने छात्र पढ़कर निकल चुके हैं… अफ़रोज़ साहिल कहते हैं, ‘इंसानों की तरह इदारों की भी उम्र होती है. जामिया ने अपनी ज़िन्दगी के सौ साल पूरे कर लिए हैं. मैं ख़ुश हूं कि मुझे मौक़ा मिला कि सौ साल पूरा होने पर जामिया के असल इतिहास व मक़सद को अपनी पीढ़ी के नौजवानों तक पहुंचा दूं. यक़ीनन मेरे बाद की नस्लें भी इस किताब से फ़ायदा हासिल करेंगी. उम्मीद करता हूं कि इस देश में गांधी और जामिया दोनों के ही इतिहास में रूचि रखने वाले लोगों के लिए ये किताब वरदान साबित होगी.’
beyondheadlines.in
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Monday, October 28, 2019
अफरोज आलम साहिल की किताब 'जामिया और गांधी' का विवोचन
अफरोज आलम साहिल की किताब 'जामिया और गांधी' आज जामिया के डॉ. एम.ए.अंसारी ऑडिटोरियम में पूर्व वाइस चांसलर डॉ. सैय्यद शाहिद मेहदी साहब, मौजूदा वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर नजमा अख़्तर साहिबा, रजिस्ट्रार ए.पी. सिद्दीक़ी साहब (आईपीएस) और जामिया के जनसंपर्क अधिकारी एवं मीडिया संयोजक अहमद अज़ीम साहब के हाथों खचाखच भरे महफ़िल में रिलीज़ हुआ... किताब कुछ देर में जामिया ऑडिटोरियम के सामने उपलब्ध होगी...!
Sunday, October 27, 2019
मालवीय नगर में हवा की गुणवत्ता हुई ‘बहुत खराब’
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को दिवाली के दिन प्रदूषण की वजह से धुंध छा गई और वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब' स्तर पर पहुंच गई. सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पटाखा छोड़ने के लिए दो घंटे की सीमा तय की थी, लेकिन लोगों ने इसके अलावा भी पटाखे छोड़े. दिल्ली की हवा में पटाखों की तेज आवाज के साथ ही जहरीला धुंआ और राख भर गया और कई स्थानों पर वायु गुणवत्ता का स्तर ‘गंभीर' स्तर को पार गया. लोगों ने मालवीय नगर, लाजपत नगर, कैलाश हिल्स, बुराड़ी, जंगपुरा, शाहदरा, लक्ष्मी नगर, मयूर विहार, सरिता विहार, हरी नगर, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, द्वारका सहित कई इलाकों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखा छोड़ने के लिए तय दो घंटे की समयसीमा का उल्लंघन करके पटाखे छोड़ने की सूचना दी, मालवीय नगर में भी पटाख़े जल रहे हैं धुएं की वजह सभी गेट ओर विन्डो बंद करनी पड़ी, अजीब सी तबियत हो रही है, मेरी एक महीने की बेटी है धुएं की वजह से उसे कोई प्रॉब्लम हो इसलिये विलेज भेज दिया, जहाँ शुद्ध वातावरण है, ये दीवाली परेशानी वाली, विधाता बचाये पॉल्युशन से,
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