Thursday, March 5, 2020

मेहरबाान सैफी ने अपनी कविताओं से आम आदमी पार्टी को दिखाया आईना

शायर को वक़्त का आईना कहा जाता है। वो जो देखता है वही अपने क़लम से उसे अदा कर देता है। जब #आप जीती तो शायर मेहरबान सैफी अपने ख्याल का इज़हार कुछ यूँ करते हैं, नफ़रत के दौर में भी मुहब्बत से जीत कर, इंसानियत का पाठ पढ़ाया है आप ने। और जब #आप ने जीतने के बाद अपना रंग दिखाया तो शायर अब के हालात को और अपने गम को इस तरह बयान करता है कि, किस पर करें भरोसा करें किस पर ऐतबार, गिरगिट के जैसा रंग दिखाया है आप ने। वाक़ई शायर के दिमाग को कोई नहीं पहुच सकता फैजान खान के कलम से...!


Wednesday, March 4, 2020

RTI से खुलासा- हरियाणा सरकार के पास नहीं हैं CM मनोहर लाल खट्टर की नागरिकता के दस्तावेज

सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी से पता चला है कि हरियाणा सरकार (Haryana Government) के पास मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar), राज्य सरकार के कई कैबिनेट मंत्रियों और राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य (Satyadev Narayan Arya) की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं. 20 जनवरी को पानीपत के रहने वाले एक्टिविस्ट पी.पी. कपूर ने इस संबंध में जानकारी पाने के लिए RTI दाखिल की थी. इस RTI में उन्हें जो जवाब मिला, वह काफी हैरान करने वाला था. 
पी.पी. कपूर की RTI में हरियाणा की पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर पूनम राठी ने कहा कि उनके रिकॉर्ड में इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, 'माननीयों के नागरिकता संबंधी दस्तावेज चुनाव आयोग के पास हो सकते हैं.' बताते चलें कि पिछले साल सितंबर में विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वादा किया था कि वह अवैध प्रवासियों को हरियाणा से निकालने के लिए राज्य में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) लागू करेंगे.
सीएम खट्टर ने पूर्व वायुसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा और हाईकोर्ट सेवानिवृत्त जस्टिस एच.एस. भल्ला से मुलाकात के बाद यह बात कही थी. उन्होंने कहा था, 'हम असम की तरह हरियाणा में भी एनआरसी लागू करेंगे.' रिटायर्ड जस्टिस ने मुख्यमंत्री को सलाह दी थी कि असमाजिक तत्वों को बाहर रखने के लिए राज्य के निवासियों के लिए एक आईडी कार्ड बनाया जाए. जिसके बाद सीएम ने कहा था, 'मैंने कहा था कि हम भल्ला जी के समर्थन और सुझाव के मद्देनजर हरियाणा में एनआरसी लागू करेंगे. इस साल जनवरी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम खट्टर ने बताया था कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर सताए गए करीब 1500 लोग हरियाणा में रहते हैं. इनमें से सिर्फ एक मुस्लिम परिवार है. अब उन लोगों (मुस्लिम परिवार को छोड़) को CAA के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी. Report@NDTVINDIA

Tuesday, March 3, 2020

ईरान ने भारत से कड़े लहज़े में कहा, भारतीय मुस्लिमों पर ज़ुल्म बन्द करें

ईरान ने भारत से मुस्लिम ना’गरिकों को लक्षित करने वाली “ठ’गी” और सां’प्रदा’यिक हिं’सा को रोकने के लिए कहा है। ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ का असामान्य रूप से कड़ा बयान भारत के ईरान के चाबहार बंदरगाह पर फास्ट-ट्रैक किए गए बुनियादी ढांचे के काम के पांच दिन बाद आया है। ”विदेश मंत्री जरीफ ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “ईरान भारतीय मुस’लमानों के खि’लाफ संग’ठित हिं’सा की लहर की निं’दा करता है। सदियों से, ईरान भारत का मित्र रहा है। हम भारतीय अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि वे सभी भारतीयों की भलाई सुनिश्चित करें और संवेदनहीन ठ’गी न होने दें। पथ आगे शांतिपूर्ण संवाद और कानून के शासन में निहित है।”विदेश मंत्रालय को अभी भी दिल्ली के दं’गों की ईरानी मंत्री की निं’दा का जवाब नहीं मिला है। जनवरी के रायसीना डायलॉग में ज़रीफ़ भारत के सबसे बड़े विदेश नीति चर्चा मंच के प्रमुख अतिथि थे। उन्होंने दोनों देशों के 19 वें संयुक्त आयोग की बैठक के लिए दिसंबर में विदेश मंत्री एस जयशंकर की मेजबानी भी की। Report@theworldnewshindi


फूड लाइसेंस की आड़ में भाजपा नेता के भाई की फैक्टरी में बन रही थी नकली दवाएं

उत्तराखंड के रुड़की में भाजपा नेता के भाई और उनके पार्टनर फूड प्रोडक्ट के लाइसेंस की आड़ में नकली दवाएं बना रहे थे। बताया जा रहा है कि यह खेल पिछले कई वर्षों से चल रहा था, लेकिन स्थानीय ड्रग विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। नामी कंपनियों ने दिल्ली विजिलेंस से शिकायत की तो मामले का खुलासा हुआ। माना जा रहा है कि अभी इसमें कई परतें खुलनी बाकी हैं और कई नाम सामने आ सकते हैं। भाजपा नेता के भाई ने अपने दो पार्टनरों के साथ गांव में ही फूड प्रोडक्ट बनाने के नाम से एक कंपनी खोली थी। फूड प्रोडक्ट का लाइसेंस भी फोर्थ क्लास का बनवाया था। इस लाइसेंस की समय सीमा भी 16 फरवरी 2020 को खत्म हो गई थी। पिछले कई सालों से यह फैक्टरी बिना किसी रोकटोक के चल रही थी। सोमवार को विजिलेंस ने छापा मारा तो एक बड़ा खुलासा हुआ। पता चला कि भाजपा नेता के भाई फूड प्रोडक्ट की आड़ में नामी कंपनियों की नकली दवाएं बना रहे थे। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि दिल्ली विजिलेंस की टीम ने मामले का खुलासा किया, लेकिन स्थानीय ड्रग विभाग की टीम को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी? 
अब मामला भाजपा नेता के भाई से जुड़ा होने पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। दिल्ली विजिलेंस की टीम ने बताया कि यहां बनने वाली नामी कंपनियों की दवाएं उत्तराखंड में ही नहीं बल्कि यूपी, हरियाणा और पंजाब में सप्लाई होती थी। अब यह जानकारी जुटाई जा रही है कि दवाएं इन प्रदेशों में किन स्थानों पर बेची जाती थी। साथ ही वहां दवाओं को खरीदने वाले कौन लोग हैं। यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि इन लोगों के संपर्क में कौन-कौन लोग हैं। बताया जा रहा है नकली दवाओं की शिकायत पर दिल्ली विजिलेंस की टीम पिछले एक सप्ताह से भगवानपुर क्षेत्र में डेरा डाले हुए थी। टीम ने पूरी जांच पड़ताल करने के बाद ही सोमवार को गांव में छापा मारकर नकली दवाओं की फैक्टरी का भंडाफोड़ किया। बताया जा रहा है कि सोमवार को टीम की कार्रवाई की बात लीक हो चुकी थी। इसके चलते टीम के पहुंचने से पहले ही फैक्टरी में काम करने वाले फरार हो चुके थे। उधर, जिस जगह दवाएं बनाई जा रही थी, वह गोदाम घेर के अंदर था। किसी को इसकी भनक न लगे, इसलिए घेर के अंदर दीवार भी बनाई गई है। सीढ़ियों से दीवार पार कर दवाएं सप्लाई की जाती थी। Report@AmarUjala


Monday, March 2, 2020

पूर्व उपराष्ट्रपति बोले- दिल्ली दंगे में लोग मरते रहे मोदी सरकार सोती रही, चाहती तो ये सब रोक लेती

देश की राजधानी के कई इलाकों में हिंसा हुई। विशेषकर उत्तर पूर्वी क्षेत्र में जान माल का सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ। दंगे में सरकार पर सवाल खड़े किये जा रहे है। सरकार पर यह आरोप लगाया जा रहा है की अगर सरकार चाहती तो दंगों को रोका जा सकता था पर सरकार ने दंगे होने दिए। दंगे में देशवासी मरता रहा दुकाने और घर फुंकते रहे लेकिन पीएम मोदी अमरीकी राष्ट्रपति का स्वागत कर रहे थे। पीएम मोदी उन्हें ताजमहल दिखा रहे थे तस्वीर खिंचवा रहे थे और देश की तस्वीर ढलते सूरज के साथ बद से बदतर होती जा रही थी। 
देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने मोदी सरकार को निशाना बनाते हुए कहा – ‘सरकार ने हिंसा रोकने की कोशिश नहीं की। हिंसा पूरी तरह से सुनियोजित थी और सरकार सोती रही, अगर चाहती तो ये सब रोक लेती।’ पूर्व उपराष्ट्रपति ने इतिहास की बात को दोहराते हुए कहा, पहले भी दिल्ली में कत्लेआम हुए। लेकिन वो बाहर वाले आक्रमणकारी करते-करवाते थे। अब दूसरे तरह की हत्या हुई हैं। 1947 में जो हुआ सबसे भयानक था। लेकिन यह पहली बार है जब सब कह रहे हैं कि सरकार ने रोकने की कोशिश नहीं की।’ आपकी जानकारी के लिए बता दें की दिल्ली में हुई हिंसक झड़प में अब तक 46 लोगों के मारे जाने की खबर है और लगभग 250 लोगों के घायल होने की बात सामने आ रही है। Report@boltahindustan

CM बनने के बाद पहली बार PM मोदी से मिलेंगे केजरीवाल, दिल्ली हिंसा पर हो सकती है बात

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. दोनों नेताओं के बीच ये मुलाकात संसद भवन परिसर स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में सुबह 11 बजे होगी. तीसरी बार दिल्ली का CM बनने के बाद अरविंद केजरीवाल पीएम मोदी से पहली बार मुलाकात करेंगे. ऐसे तो इस मुलाकात को औपचारिक बताया जा रहा है. लेकिन दिल्ली हिंसा के बाद की स्थिति और पुनर्वास को देखते हुए यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इस मौके पर केजरीवाल दिल्ली हिंसा पर भी बात कर सकते हैं. गौरतलब है कि तीसरी बार सीएम पद की शपथ लेने के बाद सीएम केजरीवाल ने कहा था कि वे दिल्ली के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे. इसके बाद उन्होंने बीते 19 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. दोनों के बीच हुई इस मुलाकात में दिल्ली के विकास के मुद्दे पर सहयोग पर चर्चा हुई. अमित शाह के कृष्ण मेनन मार्ग स्थित आवास पर यह मुलाकात हुई थी. सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल और अमित शाह के बीच ये शिष्टाचार मुलाकात पंद्रह मिनट तक चली थी.
अमित शाह से कर चुके हैं मुलाकात: वहीं, मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केजरीवाल ने कहा था कि यह एक अच्छी बैठक थी, जो सौहार्दपूर्ण वातावरण में आयोजित हुई. उन्होंने कहा, 'हमने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की. हम सहमत हुए कि दिल्ली के विकास के लिए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को एक साथ काम करने की आवश्यकता है. हम साथ मिलकर काम करेंगे.' वहीं, एक सवाल के जवाब में केजरीवाल ने कहा कि शाहीन बाग पर कोई बातचीत नहीं हुई. सीएम केजरीवाल ने कहा, ''आज दिल्ली सरकार के मंत्री, हेड ऑफ डिपार्टमेंट और सेक्रेट्री के साथ मीटिंग हुई जिसमें गारंटी कार्ड को किस तरह से लागू किया जा सकता है, उस पर विस्तार से चर्चा हुई. संबंधित विभागों को एक हफ्ते के अंदर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.'' Report@HindiNews18

Sunday, March 1, 2020

रेलवे परिसर और चलती ट्रेनों में 165 महिलाओं से रेप, तीन साल में 542 लोगों की हत्या

देश में क्या महिलाओं के लिए कोई स्थान सुरक्षित नहीं? सुनसान सड़कों की तो बात छोड़िए भीड़भाड़ वाली ट्रेनों और रेलवे परिसर में रेप की वारदातों की संख्या शर्मसार करने वाली है। महज 2 सालों में ट्रेनों और रेलवे परिसर में रेप के 165 मामले सामने आए हैं। सूचना के अधिकार के तहत ट्रेनों और रेलवे परिसर में हुए अपराध के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। महज तीन साल में 4,718 मामले लूट के सामने आए तो 542 लोगों की हत्या कर दी गई।
आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ की ओर से दायर आरटीआई आवदेन के जवाब में बताया गया है कि 2017-2019 के बीच रेप की 136 वारदातों को रेलवे परिसर में अंजाम दिया गया, जबकि 29 महिलाओं के संग घिनौना अपराध चलती ट्रेन में हुआ। 2017 में सामने आए 51 केसों के मुकाबले 2019 में कुछ कम 44 मामले सामने आए, जबकि 2018 में 70 महिलाओं को शिकार बनाया गया।
रेप के अलावा महिलाओं के खिलाफ अपराध के 1672 केस: पिछले साल सामने आए 44 केसों में 36 रेलवे परिसर में हुए तो 8 के संग वारदात ट्रेनों के अंदर हुई। 2018 में आए 70 केसों में 59 रेलवे परिसर में हुए तो 11 ट्रेनों के अंदर। 2017 में 51 महिलाओं संग यह अपराध हुआ, जिसमें 41 को रेलवे परिसर में शिकार बनाया गया और 10 महिलाओं संग चलती ट्रेनों में अपराध हुआ। इसी अवधि में रेप के अलावा महिलाओं के खिलाफ अपराध के 1672 केस दर्ज हुए। इनमें से 802 रेलवे परिसर में हुए तो 870 महिलाओं के खिलाफ चलती ट्रेन में अपराध के मामले आए।
542 लोगों की हत्या, 213 केसों में हत्या का प्रयास: तीन साल में 771 केस अपहरण के दर्ज हुए, जबकि 4,718 मामले लूट के हुए। 213 केस हत्या की कोशिश के हुए हैं तो 542 लोगों की हत्या कर दी गई। रेलवे में कानून व्यवस्था राज्य सरकारों का मामला है। ट्रेन परिसरों के साथ चलती ट्रेनों में अपराध को रोकना, मामले दर्ज करना, जांच और कानून व्यवस्था कायम करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है, जिसे वह गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP)/ डिस्ट्रिक्ट पुलिस के जरिए अंजाम देती है।
सरकार ने कहा, उठाए जा रहे हैं कदम: हालांकि, रेलवे ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुछ कदम उठाए हैं। पिछले महीने एक सवाल के जवाब में रेल मंत्री ने राज्य सभा में बताया था कि चिह्नित रूट्स और सेक्शन में 2,200 ट्रेनों में आरपीएफ सुरक्षा दे रही है, जबकि 2,200 ट्रेनों में जीआरपी सुरक्षा मुहैया करा रही है। सिक्यॉरिटी हेल्पलाइन 182 को ऑपरेशनल कर दिया गया है। महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में पुरुषों के प्रवेश पर रोक के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। 2018 और 2019 में क्रमश: 1,39,422 और 1,14,170 पुरुष यात्रियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। लेडीज स्पेशल ट्रेनों में महिला आरपीएफ की तैनाती गई है। इसके अलावा ट्रेनों में अब सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। Report PTI

हौजरानी प्रेस एन्क्लेव में बन सकता है फ्लाईओवर: 50 हजार से ज्यादा लोगों को जाम से मिलेगा छुटकारा

दिल्ली वालों को बड़ी राहत मिलने वाली है। साकेत मैक्स अस्पताल के बाहर पंडित त्रिलोक चंद शर्मा मार्ग पर लगने वाले जाम से जल्द मुक्ति मिलेगी। प...