दक्षिणी दिल्ली : मालवीय नगर थानाक्षेत्र स्थित हौजरानी में मनी एक्सचेंज फर्म के दफ्तर से चोर 10 लाख रुपये की भारतीय व विदेशी मुद्रा चुराकर ले गए। चोर ने फर्म के दफ्तर में सेंध लगाकर वारदात की। फर्म की मालकिन को यह पता चला तो वे पति के साथ मौके पर पहुंचीं और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। चोरी करते हुए चोर सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। चोर की फुटेज भी पुलिस को दे दी गई है। साउथ एक्स-1, मालवीय नगर में पूजा सेठी पति अभिनव सेठी के साथ रहती हैं। वे मेसर्स सेठी मनी एक्सचेंज फर्म की मालकिन हैं। हौजरानी, साकेत में उनकी फर्म का दफ्तर है। उन्होंने बताया कि 31 जून को वे दफ्तर में ताला लगाकर रात 9 बजे घर गईं। एक अगस्त की सुबह 5.40 बजे एक नंबर से उनके मोबाइल पर फोन आया और दफ्तर में चोरी होने की जानकारी दी। इस पर वे पति के साथ 6 बजे मौके पर पहुंचीं। सूचना पर कुछ देर बाद पुलिस भी आ गई। वहां उन्होंने देखा कि चोर सेंध लगाकर दफ्तर में घुसा और उसने अलमारियों के ताले तोड़कर चोरी की। चोर 10 लाख की करेंसी ले गया। दफ्तर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज चेक करने पर पता चला कि 1 अगस्त को तड़के एक युवक सेंध लगाकर दफ्तर में घुसा और उसने चोरी की। उसने मास्क पहना हुआ था। इसके चलते फुटेज में उसका चेहरा स्पष्ट नहीं दिख रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपित को पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
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Monday, August 5, 2019
Saturday, August 3, 2019
'ऑपरेशन गुमशुदा': दिल्ली के संगम विहार से सबसे ज्यादा बच्चे होते हैं गायब
दिल्ली बाल संरक्षण आयोग ने एक डाटा जारी किया है. जिसके मुताबिक उन्होंने दिल्ली की 20 ऐसी जगहों को चिन्हित किया है जहां से पिछले 3 साल में सबसे ज्यादा बच्चों के लापता होने के केस सामने आया है. खास तौर पर लड़कों के मुकाबले लड़कियों के ज्यादा मिसिंग होने के मामले सामने आए हैं. संगम विहार से हुए 106 बच्चे गायब: दिल्ली बाल आयोग ने यह डाटा दिल्ली पुलिस से लिया है. जिसके मुताबिक उन्होंने ऐसी 20 जगहों को चिन्हित किया है. साउथ दिल्ली के संगम विहार इलाके की बात की जाए तो यहां से पिछले 3 सालों में 106 बच्चे गायब हुए. जिनमें से 88 बच्चों को ट्रेस कर लिया गया लेकिन 18 बच्चों का कुछ पता नहीं चला है. ईटीवी भारत ने लिया स्थिति का जायजा : महिला सुरक्षा का रियलिटी चेक के लिए ईटीवी भारत की टीम पहुंची. जहां देखा गया कि भीड़भाड़ वाला यह इलाका है. यहां हमेशा आवाजाही रहती है. यहां तक कि दिल्ली पुलिस की तैनाती भी होती है. बावजूद इसके यहां से पिछले 3 सालों में 106 बच्चों के गायब होने के मामले सामने आए. भीड़भाड़ वाले इलाके पर नहीं कोई रोशनी: भीड़भाड़ वाला इलाका होने के बावजूद भी मेन रोड पर जहां पर संगम विहार के अंदर जाने के लिए जो रास्ता है वहां पर स्ट्रीट लाइट तक का प्रबंध नहीं है. इस रास्ते पर लोग अंधेरे से ही गुजरने को मजबूर हैं. सड़क पर भले ही पुलिस की तैनाती है बावजूद इसके ना तो रोशनी थी और ना ही सीसीटीवी कैमरा लगाए गए है.
Friday, August 2, 2019
'रैमॉन मैगसेसे अवॉर्ड' से एनडीटीवी के रवीश कुमार सम्मानित
एनडीटीवी के रवीश कुमार को 'रैमॉन मैगसेसे' पुरस्कार 2019 से शुक्रवार को सम्मानित किया गया है. इस पुरस्कार को नोबेल पुरस्कार का एशियाई संस्करण माना जाता है. प्रशस्ति पत्र में 44 वर्षीय कुमार को भारत के सबसे प्रभावी टीवी पत्रकारों में से एक बताया गया है. वह एनडीटीवी इंडिया में पत्रकार हैं. उनका नाम उन पांच व्यक्तियों में शुमार है जिन्हें इस पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया है. प्रशस्ति पत्र में कहा गया कि कुमार का कार्यक्रम “प्राइम टाइम” “आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.’’ साथ ही इसमें कहा गया, “अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.” इस साल के रमन मैगसेसे पुरस्कार के चार अन्य विजेताओं में म्यामां के ‘को स्वे विन’, थाइलैंड की ‘अंगखाना नीलापाइजित’, फिलीपीन के ‘रैयमुंडो पुजंते कायाबायऐब’ और दक्षिण कोरिया के ‘किम जोंग की’ शामिल हैं. 1957 में शुरू हुए इस पुरस्कार को एशिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है.
ये भारतीय पत्रकारिता और NDTV के लिए एक बड़ा दिन है. NDTV के रवीश कुमार को 'रैमॉन मैगसेसे' सम्मान मिला है. अमूमन सामाजिक कार्यों के लिए दिए जाने वाला ये पुरस्कार रवीश की सामाजिक पत्रकारिता को रेखांकित करता है. NDTV के लिए ये एक गौरव का दिन है. रवीश कुमार ने बहुत लंबा सफ़र तय किया है. बहुत नीचे से उन्होंने शुरुआत की और यहां तक पहुंचे हैं. 1996 से रवीश कुमार NDTV से जुड़े हैं. शुरुआती दिनों में NDTV में आई चिट्ठियां छांटा करते थे. इसके बाद वो रिपोर्टिंग की ओर मुड़े और उनकी सजग आंख देश और समाज की विडंबनाओं को अचूक ढंग से पहचानती रहीं. उनका कार्यक्रम 'रवीश की रिपोर्ट' बेहद चर्चित हुआ और हिंदुस्तान के आम लोगों का कार्यक्रम बन गया. बाद में एंकरिंग करते हुए उन्होंने टीवी पत्रकारिता की जैसे एक नई परिभाषा रची. इस देश में जिसे भी लगता है कि उसकी आवाज़ कोई नहीं सुनता है उसे रवीश कुमार से उम्मीद होती है. टीवी पत्रकारिता के इस शोर-शराबे भरे दौर में उन्होंने सरोकार वाली पत्रकारिता का परचम लहराए रखा है.सत्ता के खिलाफ़ बेखौफ़ पत्रकारिता करते रहे. आज उनकी पत्रकारिता को एक और बड़ी मान्यता मिली है.रवीश कुमार ने अपने प्राइम टाइम में जनसरोकार के मुद्दों पर जोर दिया. हाल में उनकी नौकरी और विश्वविद्यालय कॉलेजों को लेकर चलाई गई सीरीज को खूब पंसद किया गया है.2010 में गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 2013, 2017 में प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवॉर्ड भी मिला. 2016 में सर्वश्रेष्ठ पत्रकार का रेड इंक अवॉर्ड भी रवीश कुमार को मिला. 2017 में पहला कुलदीप नैयर पत्रकारिता अवॉर्ड मिला. 2019 में बेहतरीन पत्रकारिता के लिए रमन मैग्सेसे अवार्ड मिला. रवीश कुमार ने इश्क़ में शहर होना, देखते रहिए, फ़्री वॉयस जैसी किताबें भी लिखी हैं जो काफी पसंद की जाती हैं.
केजरीवाल सरकार की मुफ्त योजनाओं से कितना पड़ेगा खजाने पर बोझ
अरविंद केजरीवाल सरकार की ओर से महीने में 20 हजार लीटर पानी के बाद अब दौ सौ यूनिट बिजली भी फ्री कर दी गई है. वहीं मेट्रो में भी महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा देने की योजना पर काम चल रहा है. ऐसे में बिजली, पानी और मेट्रो में मुफ्त यात्रा की घोषणाओं से दिल्ली सरकार के खजाने पर आने वाले वक्त में और बोझ बढ़ेगा. वजह कि सरकार को मुफ्त की घोषणाओं से हुए नुकसान की भरपाई सब्सिडी देकर पूरी करनी पड़ेगी. दिल्ली सरकार के कुल बजट का आकार करीब 60 हजार करोड़ रुपये तक का है. मुफ्त बिजली पर अब सरकार को ढाई हजार करोड़ रुपये सालाना की सब्सिडी देनी पड़ेगी. पानी पर करीब साढ़े चार सौ करोड़ रुपये सब्सिडी पहले से दी जा रही है. मुफ्त मेट्रो सफर की भी सुविधा शुरू हुई तो 1500 करोड़ से 2000 करोड़ रुपये की और सब्सिडी बढ़ेगी. अब तक चार सौ यूनिट बिजली के बिल में दिल्ली सरकार 50 प्रतिशत तक छूट देती थी. तब 1600-1700 करोड़ रुपये की सब्सिडी सरकार को बिजली कंपनियों को देनी पड़ती थी. मगर अब दौ सौ यूनिट तक बिजली उपभोग को सरकार ने मुफ्त कर दिया है. इन उपभोक्ताओं के लिए फिक्स्ड चार्ज भी हटा दिया गया है. बताया जा रहा है कि इससे सरकार से मिलने वाली सब्सिडी का आंकड़ा ढाई हजार करोड़ रुपये सालाना पहुंच जाएगा. अरविंद केजरीवाल सरकार के फैसले से दिल्ली में 26 लाख उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा. विभागीय आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में वर्ष 2018-19 में दो सौ यूनिट के बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 26 लाख है वहीं दौ सौ से चार सौ यूनिट वाले उपभोक्ताओं की संख्या 14 लाख है. दिल्ली में कुल 47 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं. बिजली विभाग के अधिकारी बताते हैं कि चार सौ यूनिट तक 50 प्रतिशत छूट देने के फैसले के कारण केजरीवाल सरकार को हर साल 1600-1700 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ता था. बता दें कि फरवरी, 2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चार सौ यूनिट तक बिजली बिल में 50 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की थी. वहीं महीने में 20 हजार लीटर तक पानी का बिल भी माफ कर दिया था. आंकड़ों को देखें तो 2015-16 में सरकार ने पानी और बिजली सब्सिडी के लिए 1,690 करोड़ जारी किए थे. सिर्फ पानी की सब्सिडी पर करीब 450 करोड़ वार्षिक खर्च होते हैं. 2018-19 में अरविंद केजरीवाल सरकार ने 1699 करोड़ रुपये सिर्फ बिजली की सब्सिडी के लिए जारी किए थे.
भगवंत मान बोले- जलियांवाला बाग कांड के बाद हरसिमरत के दादा के घर डायर ने किया डिनर
जलियांवाला बाग बिल को लेकर आम आदमी पार्टी के पंजाब से सांसद भगवंत मान का कहना है कि जलियांवाला बाग के बोर्ड में न कांग्रेस, न बीजेपी, न अकाली किसी दल को नहीं रखा जाना चाहिए. आज जलियांवाला बाग की घटना को 100 साल हो गए हैं. भगवंत मान ने कहा, जलियांवाला बाग को देखने अब बहुत पर्यटक आते हैं. खासकर उस कुएं को जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों ने कूदकर अपनी जान दे दी थी, लेकिन वहां के लिए क्या किया गया, कुछ भी नहीं. अगर आप 100 साल बाद जलियांवाला बाग को याद कर रहे हैं तो पहली बात कांग्रेस, अकाली, बीजेपी से इसे आजाद करना चाहिए. जलियांवाला बाग सबका है किसी की जागीर नहीं है. इसके बोर्ड का चेयरमैन किसी भी राजनीतिक पार्टी का नहीं होना चाहिए. भगवंत सिंह मान का कहना है कि जिस ऊधम सिंह ने 22 साल बाद इस घटना का बदला लिया, उसका कोई स्टैच्यू नहीं है. ऊधम सिंह का स्टैच्यू संसद भवन में होना चाहिए. वहीं सावरकर ने अंग्रेजों से डरकर मांफी मांगी और उसको सम्मान दिया जाता है. ऊधम सिंह ने कोई माफी नहीं मांगी, जबकि ऊधम सिंह ने जनरल डायर को गोली मारकर अपनी पिस्तौल दे दी थी. इसके बाद ऊधम सिंह ने कहा कि मैंने अपना बदला ले लिया. जलियांवाला बाग में हजारों लोगों को मारने के बाद जनरल डायर ने हरसिमरत कौर बादल के दादा सुंदर सिंह मजीठिया के घर पर डिनर किया था. जलियांवाला बाग ट्रस्ट संशोधन बिल लोकसभा में पास हो गया है जिसपर केंद्रीय टूरिज्म एंड कल्चर मिनिस्टर प्रहलाद पटेल ने आजतक से खास बातचीत में कहा, 'कांग्रेस के पास कहने के लिए कुछ नहीं है जब भी कोई सरकार में आता है सबसे पहले पहले तो संस्था पर कब्जा करते हैं. हमें नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने संस्था का राष्ट्रीयकरण किया है. अब फर्क यह है कि इसमें कांग्रेस अध्यक्ष का नाम लिखा हुआ था जिसको हम लोगों ने हटाया है.'
Thursday, August 1, 2019
गीत--उस पार जाना चाहता हूँ
काव्य रूपी नाव ले उस पार जाना चाहता हूँ ।
शब्द की पतवार से सागर हराना चाहता हूँ ।।
गद्द रूपी पंक्तियों को तोड़कर कविता बनायी ।
रेत में डूबी नदी को खोद कर सरिता बहायी ।
जोड़ अक्षर के सहारे, तोड़ लाया चाँद तारे ,
जिंदगी के इस किले को यूँ सजाना चाहता हूँ ।।
शब्द की पतवार से सागर हराना चाहता हूँ ।।1।।
जनता हूँ इस जगत में पुष्प की है आयु कितनी ।
और जीवन की गगर में प्राण रूपी वायु कितनी ।
ओज के यस गान न्यारे ,मौन करुणा के सहारे,
फैल कर आकाश तक विस्तार पाना चाहता हूँ ।।
शब्द की पतवार से सागर हराना चाहता हूँ ।।2।।
जीवनी कैसा प्रभंजन और कितनी आपदाएं ।
एक तरणी एक नाविक नापनी हैं दस दिशाएं ।
दिख रहा आता बुढापा ,देह का हर रोम काँपा ,
उठ रहे तूफान पर अंकुश लगाना चाहता हूँ ।।
शब्द की पतवार से सागर हराना चाहता हूँ ।।3।।
हाथ की रेखा हमेशा भाग्य लीकों से लड़ी है ।
भूख पीछे छोड़ता हूँ प्यास मुँह खोले खड़ी है ।
भूत के आयाम सारे ,राह आगे की सँवारे ,
प्रीत "हलधर"गीत में अमरत्व लाना चाहता हूँ ।।
शब्द की पतवार से सागर हराना चाहता हूँ ।।4।।
जसवीर सिंह 'हलधर'
देहरादून उत्तराखंड --248001
शब्द की पतवार से सागर हराना चाहता हूँ ।।
गद्द रूपी पंक्तियों को तोड़कर कविता बनायी ।
रेत में डूबी नदी को खोद कर सरिता बहायी ।
जोड़ अक्षर के सहारे, तोड़ लाया चाँद तारे ,
जिंदगी के इस किले को यूँ सजाना चाहता हूँ ।।
शब्द की पतवार से सागर हराना चाहता हूँ ।।1।।
जनता हूँ इस जगत में पुष्प की है आयु कितनी ।
और जीवन की गगर में प्राण रूपी वायु कितनी ।
ओज के यस गान न्यारे ,मौन करुणा के सहारे,
फैल कर आकाश तक विस्तार पाना चाहता हूँ ।।
शब्द की पतवार से सागर हराना चाहता हूँ ।।2।।
जीवनी कैसा प्रभंजन और कितनी आपदाएं ।
एक तरणी एक नाविक नापनी हैं दस दिशाएं ।
दिख रहा आता बुढापा ,देह का हर रोम काँपा ,
उठ रहे तूफान पर अंकुश लगाना चाहता हूँ ।।
शब्द की पतवार से सागर हराना चाहता हूँ ।।3।।
हाथ की रेखा हमेशा भाग्य लीकों से लड़ी है ।
भूख पीछे छोड़ता हूँ प्यास मुँह खोले खड़ी है ।
भूत के आयाम सारे ,राह आगे की सँवारे ,
प्रीत "हलधर"गीत में अमरत्व लाना चाहता हूँ ।।
शब्द की पतवार से सागर हराना चाहता हूँ ।।4।।
जसवीर सिंह 'हलधर'
देहरादून उत्तराखंड --248001
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